18 जनवरी को होगा घाटवाक विश्वविद्यालय का आठवां वार्षिक समारोह
‘मोबाइल के दास / घाट के पास’ थीम के साथ रीवा घाट से राजघाट तक सांस्कृतिक यात्रा
वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय काशी घाटवाक विश्वविद्यालय का आठवां वार्षिक समारोह रविवार, 18 जनवरी 2026 को काशी के ऐतिहासिक घाटों पर आयोजित किया जाएगा। इसको लेकर विश्वविद्यालय की एक आवश्यक बैठक हिंदी विभाग स्थित ‘विरासत कक्ष’ में सम्पन्न हुई, जिसमें कार्यक्रम की रूपरेखा और केंद्रीय विषय तय किया गया।



इस वर्ष घाटवाक का केंद्रीय विषय रखा गया है—‘मोबाइल के दास / घाट के पास’, जिसके माध्यम से लोगों को मोबाइल की आभासी दुनिया से बाहर निकलकर प्रकृति के मुक्त प्रांगण और काशी की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ने का संदेश दिया जाएगा।

रीवा घाट से राजघाट तक घाटवाक यात्रा

आठवें घाटवाक समारोह का उद्घाटन रीवा घाट पर होगा। इसके बाद यात्रा- क्षेमेश्वर घाट, मणिकर्णिका घाट, रामघाट से होते हुए राजघाट पर संपन्न होगी।
इस दौरान विभिन्न घाटों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, वैचारिक संवाद और रचनात्मक आयोजन भी आयोजित किए जाएंगे।
समारोह के दौरान सामाजिक सरोकारों में सक्रिय संस्थाओं- अभ्युदय संस्था, रोटी बैंक, होप फाउंडेशन, नंदिनी फाउंडेशन को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।

बाहर से आ रहे घाटवाकरों को काशी से जोड़ने का प्रयास
बैठक में घाटवाक के संस्थापक और वरिष्ठ न्यूरो चिकित्सक प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि इस बार घाटवाक में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी आ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि बाहर से आने वाले लोग काशी की सांस्कृतिक सम्पन्नता, घाटों की चेतना और जीवन दर्शन से सीधे परिचित हो सकें।*
काशी के घाट ज्ञान और चिंतन के केंद्र
बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि- “काशी के घाट केवल स्थापत्य नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद और चिंतन के प्रमुख आधार हैं। इन घाटों की बनावट में काशी की बहुसांस्कृतिक पहचान निहित है, जिससे लोगों को परिचित कराना इस समारोह का प्रमुख उद्देश्य है।”
बैठक में रहे शारदा सिंह, डॉ विन्ध्याचल यादव, अनूप पांडेय, मनीष खत्री, सत्यम पांडेय, शैलेश तिवारी, गौरव द्विवेदी, बिशाल पांडेय, इष्टदेव, वाचस्पति उपाध्याय, अभय तिवारी, अभिषेक गुप्ता, डॉ आर्यपुत्र दीपक, डॉ उदय पाल, मनीष राय के साथ कई प्रमुख घाटवाकर उपस्थित रहे।
