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वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब, वरुणा के तटीय इलाकों में घुसा पानी; 6 बाढ़ राहत शिविर एक्टिव

डीएम सत्येंद्र कुमार का बयान: प्रभावित क्षेत्रों से लोगों का रेस्क्यू जारी, राहत शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य सुविधा व बच्चों की पढ़ाई के पुख्ता इंतजाम

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वाराणसी (भदैनी मिरर)। वाराणसी जनपद में गंगा और वरुणा नदी के बढ़ते जलस्तर ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। केन्द्रीय जल आयोग (CWC) के अधिकृत आंकड़ों के अनुसार सोमवार सायं 8 बजे वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर 70.15 मीटर दर्ज किया गया, जो कि चेतावनी जलस्तर (70.262 मीटर) के बेहद करीब पहुंच गया है। नदी का जलस्तर 2 सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है।

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वरुणा का बैक-फ्लो बना मुसीबत, सड़कों व गलियों में नाव


गंगा में उफान के कारण वरुणा नदी के तटीय इलाकों में बैक-फ्लो का पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है। नक्की घाट, सरैया, कोनिया और सलारपुर जैसे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। कई इलाकों में गलियों तक पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित हुआ है और नाव चलाने की नौबत आ गई है। घाटों का संपर्क टूटने से श्मशान घाटों पर शवदाह में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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जिला प्रशासन अलर्ट, 6 बाढ़ राहत शिविर चालू


बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि वरुणा किनारे के प्रभावित मोहल्लों से लोगों को सुरक्षित निकालने (इवाकुएट करने) का कार्य तेजी से चल रहा है।

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डीएम सत्येंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए कहा:
 

> "वर्तमान में 6 बाढ़ राहत शिविरों को संचालित कर दिया गया है, जहां लगभग 285 प्रभावित लोग रह रहे हैं। जनपद में कुल 61 बाढ़ राहत शिविर चिह्नित हैं, जिन्हें आवश्यकतानुसार चरणबद्ध तरीके से एक्टिवेट किया जाएगा। तटीय इलाकों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और फ्लड पीएसी की टीमें तैनात हैं तथा लगातार लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर आने की अपील की जा रही है।"


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राहत शिविरों में 3 समय भोजन, चिकित्सा और सुरक्षा के कड़े प्रबंध


प्रशासन की ओर से राहत शिविरों में विस्थापित परिवारों के लिए मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है:
 * भोजन व पोषण: शिविरों में निवासरत लोगों को दिन में तीन बार स्वच्छ और ताजा भोजन दिया जा रहा है। बच्चों व बुजुर्गों के लिए दूध और केला भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
 * बच्चों की पढ़ाई व देखभाल: 6 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिविरों में क्लासरूम शुरू कर शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्री-प्राइमरी शिक्षा और पूरक पोषण आहार की व्यवस्था की गई है।
 * चिकित्सा व स्वच्छता: स्वास्थ्य विभाग की टीमें शिविरों में नियमित चिकित्सीय परीक्षण कर रही हैं। नगर निगम की ओर से फॉगिंग, साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और पर्याप्त बिस्तरों का प्रबंध किया गया है।
 * सुरक्षा व्यवस्था: विस्थापित लोगों के खाली पड़े मकानों की सुरक्षा के लिए पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
जिला प्रशासन और संबंधित विभाग (पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम, जल पुलिस) आपस में समन्वय बनाकर पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। आपदा प्रबंधन के तहत बचाव उपकरण, नाव और मानव संसाधन को स्टैंडबाय पर रखा गया है।