काशी में उफान पर गंगा: 24 घंटे में 3 फीट बढ़ा पानी, घाटों की भौगोलिकता बदली
वाराणसी में गंगा का विकराल रूप: घाटो का संपर्क टूटा, आरती का स्थान बदला और बाहरी नावों पर लगी रोक
वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब धर्मनगरी काशी में साफ दिखाई देने लगा है। वाराणसी में गंगा नदी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे घाटों की सूरत बदल गई है। बीते 24 घंटों में जलस्तर में करीब तीन फीट का उछाल दर्ज किया गया है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा का जलस्तर 63 मीटर के आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे नाविकों, पुरोहितों और तटीय इलाकों के निवासियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।


दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर आरती का स्थान बदला, संपर्क मार्ग जलमग्न
गंगा के तेजी से बढ़ते जलस्तर के कारण अस्सी घाट और विश्वप्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर होने वाली मां गंगा की आरती का स्थान बदलना पड़ा है। अब दोनों प्रमुख घाटों पर मुख्य चबूतरे से करीब 10 फीट ऊपर आरती संपन्न कराई जा रही है।
इसके साथ ही, घाटों का आपसी संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट चुका है। शनिवार सुबह तुलसी घाट से पम्पवा घाट जाने वाले प्लेटफॉर्म पर पानी आ गया। वहीं, दशाश्वमेध घाट से अहिल्याबाई घाट और अन्य आसपास के घाटों की ओर जाने वाले रास्ते भी जलमग्न हो चुके हैं।

प्रशासन सख्त: बाहरी नावों पर रोक, बिना लाइफ जैकेट नौकायन बैन
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। दशाश्वमेध घाट पर आरती के समय बाहरी नावों को पार्क करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। प्रशासन ने नाविकों के साथ आपात बैठक कर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं:

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किसी भी स्थिति में क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाई जाएं।
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प्रत्येक पर्यटक के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य होगा।
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सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक निर्देशों पर प्रतिक्रिया देते हुए नाविक शंभु निषाद ने कहा कि सभी नाविक सुरक्षा मानकों और सरकारी दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे।
पुरोहितों और नाविकों पर मंडराया आजीविका का संकट
अस्सी घाट के पुजारी बलिराम मिश्र ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पानी का स्तर बढ़ने से स्नानार्थियों को परेशानी हो ही रही है, साथ ही नियमित पूजा-पाठ और कर्मकांड भी प्रभावित हो रहे हैं। यदि गंगा के जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो नौका संचालन पूरी तरह ठप हो सकता है, जिससे घाट किनारे रहने वाले नाविकों और तीर्थ पुरोहितों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

