वाराणसी के बेनीपुर में 'मृदा स्वास्थ्य और उर्वरक' पर किसान प्रशिक्षण: रासायनिक खाद निर्भरता घटाने के गुर सीखे सब्जी उत्पादक
ईको प्रिज्म कलेक्टिव फाउंडेशन (EPCF) ने आयोजित किया एक दिवसीय जागरूकता शिविर; मृदा वैज्ञानिक पंकज मिश्रा व कृषि विशेषज्ञ शिवम चौबे ने किसानों को दिए टिकाऊ खेती के टिप्स।
वाराणसी (भदैनी मिरर): कृषि सुधार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रविवार (27 सितम्बर) को वाराणसी के हरहुआ विकासखंड अंतर्गत बेनीपुर गांव में ‘मृदा स्वास्थ्य, संरक्षण एवं उर्वरक’ विषय पर एक दिवसीय किसान जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

क्लाइमेट एक्शन के क्षेत्र में कार्यरत अग्रणी संस्था ईको प्रिज्म कलेक्टिव फाउंडेशन (EPCF) द्वारा आयोजित इस शिविर में क्षेत्र के लगभग 45 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जिनमें मुख्य रूप से सब्जी उत्पादक किसान शामिल रहे।
मिट्टी की सेहत सुधरेगी तो घटेगी लागत, बढ़ेगा उत्पादन
कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के व्यावहारिक उपाय बताए:

-
मृदा परीक्षण व संतुलित उर्वरक: फसलों की आवश्यकता के अनुसार ही संतुलित मात्रा में खाद डालने की सलाह दी गई, ताकि मिट्टी की प्राकृतिक उत्पादकता बनी रहे।
-
जैविक तत्वों की वृद्धि: मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने और मृदा अपरदन (Soil Erosion) को रोकने के प्रभावी उपायों पर तकनीकी जानकारी दी गई।
-
लागत में कमी: कम लागत वाली, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती का खर्च घटाने के लिए प्रेरित किया गया।
विशेषज्ञों ने किया समस्याओं का समाधान
प्रशिक्षण के दौरान मृदा वैज्ञानिक पंकज मिश्रा एवं कृषि विशेषज्ञ शिवम चौबे ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मिट्टी के स्वास्थ्य और उर्वरक प्रबंधन की तकनीक साझा कीं। विशेषज्ञों ने किसानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के व्यावहारिक समाधान भी दिए।
संस्था (EPCF) की ओर से बताया गया कि बेनीपुर में संचालित जलवायु-सहिष्णु (Climate-Resilient) कृषि पहल के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने और रसायनों पर निर्भरता कम करने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।


