अधीक्षण अभियंता कार्यालय पहुंचे बिजलीकर्मी, दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
718 की जगह 489 संविदाकर्मियों को रखने के टेंडर, 641 में से 152 को निकालने के आदेश से नाराज है कर्मचारी

प्रतिनिधिमंडल ने कहा-48 घंटे में आदेश निरस्त नही हुआ तो करेंगे अनिश्चितकालीन सत्याग्रह
यूपी में बिजली के निजीकरण पर अमादा सरकार के खिलाफ 369 वें दिन विरोध जारी
वाराणासी, भदैनी मिरर। बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे आंदोलन के 369 वें दिन मंगलवार को बिजलीकर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय के सिगरा स्थित कार्यालय पर जमकर विरोध प्रदर्शन। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहाकि अधीक्षण अभियंता नगरीय विद्युत वितरण मंडल-द्वितीय वाराणासी मंडल के अंतर्गत मानक के विरुद्ध 718 संविदाकर्मियों की जगह मात्र 489 संविदाकर्मियों का टेंडर किया गया। वर्तमान में कार्यरत 641 संविदाकर्मियों में से 152 संविदाकर्मियों को निकालने के आदेश के खिलाफ संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल अधीक्षण अभियंता से मिला। वर्तमान संविदाकर्मियों एवं कैश काउंटर ओपरेटर की जगह फिनटेक कम्पनी से राजस्व संग्रहण का कार्य कराने के आदेश को 48घंटे के अंदर निरस्त कराने का आग्रह किया।




उन्होंने कहाकि यदि यह आदेश निरस्त नही होता है तो 48 घण्टे बाद समस्त बिजलीकर्मी अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आन्दोलन शुरू कर देंगे। सभा में वक्ताओ ने कहाकि उपभोक्ताओं के लिए 01 दिसंबर से प्रारंभ बिजली बिल राहत योजना में पहले दिन प्रदेश भर में बिजलीकर्मियों ने उपभोक्ताओं को इस योजना में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रेरित किया। बिजलीकर्मी पूरे दिन काम में लगे रहे और तथा निजीकरण के विरोध में कार्यालय समय के बाद समस्त जनपदों में प्रदर्शन किया।संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन निजी घरानों के साथ मिली भगत में प्रदेश के मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल बेचना चाहते हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने बिजनेस प्लान के तहत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 824.65 करोड रुपए और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 819 करोड रुपए का बिजनेस प्लान स्वीकृत किया है।


बिजनेस प्लान के तहत इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु कार्य होना है। इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में बिजनेस प्लान के तहत 16.43 अरब रुपए खर्च करने के बाद इन निगमों को निजी घरानों को कौड़ियों के मोल बेचना कदापि स्वीकार्य नहीं है। कहा कि भारत सरकार की आरडीएसएस योजना के अंतर्गत विद्युत वितरण निगमों में नए बिजली उपकेंद्रों को बनाने और बने बिजली उपकेंद्रों को सुधार करने और उनका नवीनीकरण करने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए भारत सरकार ने 7089 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। आरडीएसएस योजना के अंतर्गत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 3842 करोड रुपए और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 3247 करोड रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रतिनिधि मंडल में ई. मायाशंकर तिवारी, राजेन्द्र सिंह, अंकुर पाण्डेय, संदीप कुमार, राजेश सिंह, जमुना पाल, धर्मेन्द्र यादव, अभिषेक सिंह, मनोज जैसवाल, मनोज यादव, जितेंद्र कुमार आदि रहे।


