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दालमंडी चौड़ीकरण पर हाईकोर्ट का दखल, सरकार से मांगा एक हफ्ते में जवाब

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Varanasi News : वाराणसी के ऐतिहासिक दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट के तहत तोड़े जाने वाले 189 मकानों की यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। यानी, फिलहाल न कोई तोड़फोड़ होगी और न ही किसी को उजाड़ा जाएगा। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से इस पर एक हफ्ते के अंदर 20 तारीख को जवाब दाखिल करने को कहा है।

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व्यापारियों को मिली राहत की सांस

यह आदेश जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने शाहनवाज खान बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले की सुनवाई के दौरान दिया। दरअसल, चौड़ीकरण की योजना में करीब 1400 से 1500 दुकानें प्रभावित हो रही हैं। इस फैसले से दालमंडी के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को कुछ राहत जरूर मिली है, जो लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं।

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कोर्ट में रखी गई दुकानदारों की व्यथा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता शाहनवाज खान ने कोर्ट को बताया कि सरकार मुआवजे की कोई स्पष्ट नीति नहीं बता रही और व्यापारियों में डर का माहौल बना रही है। उन्होंने कहा कि बिना किसी नोटिस और मुआवजे के तोड़फोड़ की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिससे रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।

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कोर्ट ने अन्य याचिकाओं का भी लिया संज्ञान

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सैयद जाकिर हुसैन समेत कई अन्य व्यापारियों की याचिकाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण या निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा

जमीन के मुआवजे पर बना विवाद

शाहनवाज खान ने बताया कि शहरी क्षेत्र में खतौनी (जमीन का मालिकाना हक) का प्रावधान नहीं होता, बल्कि नगर निगम द्वारा जारी टैक्स कार्ड (पीला कार्ड) ही संपत्ति का प्रमाण होता है। वहीं PWD का कहना है कि वह केवल बिल्डिंग के मूल्य का मुआवजा देगा, जमीन का नहीं। कोर्ट ने इस मुद्दे पर भी सरकार से जवाब तलब किया है कि क्या बिना खतौनी के मुआवजा नहीं दिया जाएगा, और यदि दिया जाएगा तो उसका सर्किल रेट क्या होगा

दालमंडी प्रोजेक्ट की पूरी तस्वीर

दालमंडी गली वाराणसी के प्रमुख बाजारों में से एक है, जो विश्वनाथ कॉरिडोर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। सरकार ने इसे एक "मॉडल सड़क" में बदलने के लिए योजना बनाई है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के आखिरी दिन ₹200 करोड़ के प्रस्ताव में से ₹2 करोड़ की शुरुआती राशि भी जारी कर दी गई थी।

PWD ने कार्य शुरू कर दिया था और 189 मकानों की माप-जोख कर ली गई थी। सड़क की चौड़ाई 17.5 मीटर तक बढ़ाई जानी है। मगर व्यापारियों का कहना है कि बिना उचित योजना और मुआवजे के यह कार्य न्यायसंगत नहीं है।

मस्जिदें भी तोड़े जाने की योजना में शामिल

इस प्रोजेक्ट की जद में दालमंडी क्षेत्र की 6 पुरानी मस्जिदें भी आ रही हैं। इनमें रंगीले शाह मस्जिद, अली रजा मस्जिद, संगमरमर मस्जिद और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं। इन मस्जिदों के ट्रस्टियों ने भी कोर्ट में आवाज उठाई है और इस फैसले को धार्मिक और सामाजिक तौर पर संवेदनशील बताया है।

ज्ञानवापी केस से जुड़े लोग भी बोले विरोध में

ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने भी इस योजना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने अभी तक कोई स्पष्ट नक्शा या अधिसूचना जारी नहीं की है। उन्होंने सवाल उठाया – “क्या सरकार अचानक बुलडोजर लेकर आ जाएगी? मुआवजा दिए बिना लोगों को हटाना क्या जायज होगा?” उन्होंने सरकार से अपील की कि इस बाजार को छोड़ दिया जाए क्योंकि इससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।