CM in Varanasi: ‘मंदिर तोड़े नहीं गए, उनका पुनरुद्धार हुआ है’, मणिकर्णिका विवाद पर बोले सीएम योगी – कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार
मणिकर्णिका घाट निरीक्षण के बिना ही सर्किट हाउस से बोले मुख्यमंत्री, कहा– AI जनरेटेड वीडियो से सनातन आस्था को भड़काने की साजिश, काशी में 11 वर्षों में ₹55 हजार करोड़ की परियोजनाएं
वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्यों और उससे जुड़े सियासी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे। हालांकि तमाम अटकलों और प्रशासनिक तैयारियों के बावजूद मुख्यमंत्री मणिकर्णिका घाट नहीं गए। बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद वे सीधे सर्किट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने विकास कार्यों की समीक्षा बैठक के बाद मीडिया को संबोधित किया।



सीएम योगी ने मणिकर्णिका घाट से जुड़े विवाद पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “मंदिरों को तोड़ने का दुष्प्रचार सरासर झूठ है। मंदिर तोड़े नहीं गए हैं, बल्कि उनका पुनरुद्धार किया गया है। कांग्रेस और उसके सहयोगी सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को भड़काने के लिए AI जनरेटेड और भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी अविनाशी है और हर सनातनी व भारतवासी के लिए श्रद्धा का केंद्र रही है, लेकिन आज़ादी के बाद दशकों तक काशी को वह सम्मान और विकास नहीं मिला, जिसकी वह हकदार थी। पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी ने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और भौतिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है।

सीएम योगी ने बताया कि बीते 11 वर्षों में काशी के लिए ₹55,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनमें से करीब ₹6,000 करोड़ की योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष पर तेजी से काम चल रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। जहां 2014 से पहले प्रतिदिन 5 से 25 हजार श्रद्धालु आते थे, वहीं अब औसतन सवा लाख से डेढ़ लाख श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन कर रहे हैं। सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर यह संख्या 6 से 10 लाख तक पहुंच जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी के विकास से पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। काशी ने अकेले देश की GDP में लगभग ₹1.3 लाख करोड़ का योगदान दिया है। सड़क, रेल, हवाई और जलमार्ग कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। गंगा की स्वच्छता, घाटों का सुंदरीकरण और नमो घाट जैसे प्रोजेक्ट काशी की नई पहचान बने हैं।
मणिकर्णिका घाट के विकास कार्यों पर सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना किसी धार्मिक परंपरा में हस्तक्षेप के लिए नहीं, बल्कि अंतिम संस्कार जैसे सनातन धर्म के महत्वपूर्ण संस्कार को गरिमापूर्ण, सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में संपन्न कराने के लिए है। यह कार्य सरकारी बजट से नहीं बल्कि CSR फंड के माध्यम से किया जा रहा है। बरसात के समय होने वाली अव्यवस्था, अधजले शवों और गंगा प्रदूषण जैसी समस्याओं को रोकने के लिए आधुनिक, इको-फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा और मणिकर्णिका घाट से जुड़े सभी पौराणिक व धार्मिक स्थलों का संरक्षण पूरी प्रतिबद्धता से किया जा रहा है। “काशी विश्वनाथ धाम की तरह मणिकर्णिका घाट भी अपनी प्राचीन पहचान के साथ नए स्वरूप में सामने आएगा,” सीएम ने कहा।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अपने शासनकाल में न तो विरासत का सम्मान किया और न ही विकास को आगे बढ़ाया। “जो लोग सदैव विरासत का अपमान करते रहे, वे आज विकास कार्यों में बाधा डालने की साजिश कर रहे हैं। जनता सब देख रही है और सच्चाई जानती है,” उन्होंने कहा।
सीएम योगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जनभावनाओं को भड़काने और दुष्प्रचार फैलाने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वह तथ्यों के साथ सच्चाई जनता तक पहुंचाए।
गौरतलब है कि मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा, मढ़ी और कथित तोड़फोड़ से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस और अन्य संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। मुख्यमंत्री के घाट निरीक्षण न करने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं, हालांकि सरकार ने विकास कार्यों को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
