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BHU का एक्शन: प्रोफेसर ब्रजभूषण ओझा को श्री विश्वनाथ मंदिर मानद प्रबंधक पद से हटाया गया

SVDV संकाय के धर्मशास्त्र एवं मीमांसा विभाग के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे को 2 वर्षों के लिए सौंपा गया अतिरिक्त प्रभार

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वाराणसी (भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के प्रोफेसर पर नौकरी दिलाने के नाम पर 4 लाख रुपये लेने के गंभीर आरोपों के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। BHU कुलपति के आदेश पर व्याकरण विभाग के प्रो. ब्रजभूषण ओझा को श्री विश्वनाथ मंदिर (VT) के मानद प्रबंधक (Honorary Manager) पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।

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उप-कुलसचिव (सामान्य प्रशासन) द्वारा 4 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना (Notification) के अनुसार, SVDV संकाय के धर्मशास्त्र एवं मीमांसा विभाग के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे को 2 वर्षों की अवधि के लिए श्री विश्वनाथ मंदिर के मानद प्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

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सूत्रों का दावा: 4 लाख के लेन-देन और पुलिस हस्तक्षेप के बाद हुआ एक्शन


विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, यह प्रशासनिक कार्रवाई प्रोफेसर पर लगे नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे के कथित लेन-देन के आरोपों के बाद सामने आई है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध एक महाविद्यालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 4 लाख रुपये लेने से संबंधित एक शिकायती पत्र और ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था।

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लंका थाने में देर रात लौटाए गए थे पैसे, पुलिस ने कराया था समझौता


वायरल शिकायती पत्र और ऑडियो का संज्ञान लेते हुए लंका थाना पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया था। पुलिस ने शिकायतकर्ता और प्रोफेसर को थाने बुलाया। लंका पुलिस की मौजूदगी में देर रात प्रोफेसर ने शिकायतकर्ता को पूरे 4 लाख रुपये वापस कर दिए। पैसे वापस मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने अपना पत्र वापस ले लिया था, जिसके कारण पुलिस ने इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं की थी।

विश्वविद्यालय में चर्चाओं का बाजार गर्म


थाने में पैसे लौटाए जाने और मामला शांत होने के तुरंत बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी इस नोटिफिकेशन को सीधे तौर पर इस प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में पद से हटाए जाने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं है, लेकिन कैंपस में इसे विश्वविद्यालय की छवि बचाने के लिए उठाया गया सख्त कदम माना जा रहा है।

(नोट: वायरल शिकायती पत्र और ऑडियो की सत्यता की पुष्टि 'भदैनी मिरर' नहीं करता है।)