UGC विनियम के समर्थन में BHU में SC/ST/OBC छात्रों का मार्च, अंबेडकर तस्वीरों के साथ MMV चौराहे तक पहुंचे
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अगली सुनवाई तक रोक के बीच बीएचयू कैंपस में यूजीसी विनियम के समर्थन में निकली रैली, प्रशासन ने की भारी सुरक्षा व्यवस्था
वाराणसी,भदैनी मिरर। यूजीसी (UGC) के नए विनियमों को लेकर देशभर में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच अब इस मुद्दे पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में अलग-अलग मत सामने आने लगे हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यूजीसी विनियम पर अगली सुनवाई तक रोक लगाए जाने के बाद मंगलवार को बीएचयू में एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग के छात्रों ने इन विनियमों के समर्थन में मार्च निकाला।


यह मार्च विश्वनाथ मंदिर (VT) बीएचयू से शुरू होकर विश्वविद्यालय के विभिन्न मार्गों से होते हुए एमएमवी चौराहे तक पहुंचा। मार्च में कई दर्जन छात्र शामिल रहे। छात्रों के हाथों में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें और जागरूकता से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां थीं।

मार्च को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन ने पहले से ही एहतियातन भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी थी, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।

शोध छात्र संदीप पटेल का बयान
मार्च में शामिल शोध छात्र संदीप पटेल ने कहा कि “हम एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग के छात्र यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में यह मार्च निकाल रहे हैं। यह मार्च किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि हमारे समाज के भीतर जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से निकाला गया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि बीएचयू कैंपस में जो लोग यूजीसी विनियम का विरोध कर रहे हैं, वे पहले से ही जातिवाद को बढ़ावा देते रहे हैं। यह प्रदर्शन एससी/एसटी/ओबीसी एकता मंच, बीएचयू के तत्वावधान में आयोजित किया गया।

सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा मामला
गौरतलब है कि यूजीसी विनियम के विरोध में सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के याचिकाकर्ता डॉ. मृत्युंजय तिवारी भी बीएचयू के ही शोध छात्र हैं। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक यूजीसी विनियम पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
इससे पहले बीते दिनों बीएचयू कैंपस में सवर्ण वर्ग के छात्रों द्वारा यूजीसी विनियम के विरोध में बड़ा मार्च निकाला गया था, जिसमें हजारों की संख्या में छात्र शामिल हुए थे। अब एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों द्वारा समर्थन मार्च निकाले जाने से यह मुद्दा विश्वविद्यालय परिसर में और अधिक चर्चा का विषय बन गया है।
