BHU Protest: महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ बीएचयू में सड़कों पर उतरीं छात्राएं
दिशा छात्र संगठन के नेतृत्व में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हुंकार: जमुई, समस्तीपुर व दिल्ली की घटनाओं का जिक्र; दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
वाराणसी / भदैनी मिरर: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में महिलाओं के खिलाफ देश भर में बढ़ते अत्याचार, यौन उत्पीड़न और गंभीर अपराधों के विरोध में गुरुवार को छात्र-छात्राओं का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। दिशा छात्र संगठन के नेतृत्व में दर्जनों छात्र-छात्राओं ने एकजुट होकर विश्वविद्यालय परिसर में एक विशाल विरोध मार्च निकाला और महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान के लिए अपनी आवाज बुलंद की।

विरोध मार्च की शुरुआत बीएचयू परिसर स्थित ऐतिहासिक विश्वनाथ मंदिर (VT) से हुई। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए छात्र-छात्राएं नारेबाजी करते हुए परिसर के विभिन्न मार्गों से होते हुए महिला महाविद्यालय (MMV) चौराहे तक पहुंचे, जहां यह जुलूस एक सभा में तब्दील हो गया।
देशभर की घटनाओं को लेकर जताया आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं ने देश में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। दिशा छात्र संगठन के कार्यकर्ता ध्रुव ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा—
"आज देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं के साथ उत्पीड़न, बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जमुई, समस्तीपुर और देश की राजधानी दिल्ली समेत कई स्थानों पर घटी घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि हमारी बहनें और बेटियां कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन किसी एक क्षेत्र या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि देश भर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले हर प्रकार के अत्याचार और लैंगिक हिंसा के विरोध में आयोजित किया गया है।
महिला सुरक्षा और दोषियों पर कड़े एक्शन की मांग
मार्च में शामिल छात्र-छात्राओं ने प्रशासन और सरकार से महिला सुरक्षा को लेकर कागजी दावों के बजाय धरातल पर सख्त कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें थीं:
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महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले दोषियों पर तत्काल और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
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शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित व सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित किया जाए।
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समाज में महिलाओं के प्रति हिंसा और भेदभाव के खिलाफ प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर त्वरित कदम उठाए जाएं।
मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर परिसर के सुरक्षाकर्मी भी सतर्क नजर आए। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई, तो छात्र समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।


