BHU : महिला प्रोफेसर से अभद्रता मामले में पुलिस की FR निरस्त, कोर्ट ने दिए अग्रिम विवेचना के आदेश
पीड़िता का प्रोटेस्ट लेटर किया स्वीकार, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के पूर्व प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह के खिलाफ था आरोप
वाराणसी (भदैनी मिरर): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के ट्रॉमा सेंटर की महिला प्रोफेसर से अभद्रता और छेड़खानी के हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा मोड़ आया है। वाराणसी की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम नवम) अमित कुमार यादव की अदालत ने लंका थाना पुलिस द्वारा दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट (FR/Final Report) को निरस्त कर दिया है।

अदालत ने पीड़िता द्वारा दाखिल 'प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र' को स्वीकार करते हुए लंका थानाध्यक्ष को पीड़िता द्वारा उठाए गए बिंदुओं के आधार पर मामले की अग्रिम विवेचना (Further Investigation) करने का सख्त निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के एनेस्थीसिया विभाग में तैनात महिला प्रोफेसर से जुड़ा है। पीड़िता का आरोप है कि ट्रॉमा सेंटर के तत्कालीन प्रभारी प्रोफेसर सौरभ सिंह और उनके सुरक्षाकर्मी आए दिन उनके साथ अभद्र व्यवहार और छींटाकशी करते थे।
जब पीड़िता ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों से मौखिक शिकायत की, तो सुरक्षाकर्मियों ने गलत नीयत से उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसके बाद पीड़िता की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सुरक्षा में तैनात बाउंसर धनंजय राय और आशीष सिंह का नाम भी सामने आया था।
पुलिस जांच पर उठे गंभीर सवाल
लंका पुलिस ने विवेचना के बाद मामले में एफआर लगाते हुए केस को बंद करने की कोशिश की थी, जिस पर पीड़िता ने कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई। पीड़िता ने अपने प्रोटेस्ट पिटीशन में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। महिला प्रोफ़ेसर ने अपने प्रोटेस्ट पिटीशन में कहा है कि विवेचना अधिकारी (IO) ने पीड़िता का समुचित बयान तक दर्ज नहीं किया। घटना से जुड़े स्वतंत्र गवाहों के बयान नहीं लिए गए। पुलिस द्वारा घटनास्थल का मौका मुआयना (निरीक्षण) नहीं किया गया इसके आलावा उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की पर्याप्त जांच नहीं की गई।
अदालत ने लिया संज्ञान
अदालत ने पीड़िता की दलीलों और पुलिस की अधूरी जांच का संज्ञान लेते हुए लंका पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने लंका थाना प्रभारी को निर्देशित किया है कि वे सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की निष्पक्षता से जांच कर नए सिरे से रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
कोर्ट के इस फैसले से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, वहीं बीएचयू परिसर में प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
