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BHU: अब सभी सरकारी व प्राइवेट संस्थानों में मान्य होंगे आयुर्वेद डॉक्टरों के मेडिकल सर्टिफिकेट

बीएचयू आयुर्वेद संकाय के "शीशीक्षा" कार्यक्रम में प्रो. आनंद चौधरी ने दिए अहम निर्देश; भ्रामक विज्ञापनों से दूर रहने की सलाह

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वाराणसी (भदैनी मिरर)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान स्थित आयुर्वेद संकाय में नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) के निर्देशानुसार इंटर्न्स के लिए चल रहे सात दिवसीय उद्बोधन कार्यक्रम "शीशीक्षा" के चौथे दिन महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।

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रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर आनंद चौधरी ने 65 इंटर्न्स को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अब आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा निर्गत चिकित्सा (मेडिकल) अवकाश एवं फिटनेस प्रमाण पत्र सभी सरकारी सेवाओं, आरटीओ (RTO), बीमा कंपनियों और सभी प्राइवेट संस्थानों में पूरी तरह मान्य हैं।

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प्रमाण पत्र न मानने वाली संस्थाओं पर होगी कानूनी कार्रवाई

प्रो. आनंद चौधरी ने बताया कि यदि कोई भी सरकारी या निजी संस्था इन प्रमाण पत्रों को स्वीकार करने से मना करती है, तो वह नियमानुसार कानूनी कार्रवाई आमंत्रित कर रही है। यदि किसी आयुर्वेद डॉक्टर के प्रमाण पत्र को खारिज किया जाता है, तो संबंधित चिकित्सक तुरंत इसकी सूचना NCISM को दें। NCISM अपने संसदीय अधिकारों का प्रयोग करते हुए संबंधित संस्था को नोटिस जारी कर जवाब तलब करेगा और उन्हें अपनी नियमावली में सुधार करने के लिए बाध्य करेगा।

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भ्रामक दवाओं और विज्ञापनों के जाल से बचने की सलाह

व्याख्यान के दौरान प्रो. चौधरी ने आयुर्वेद औषधियों के भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम के लिए बने नियमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने लंबाई बढ़ाने, मोटापा घटाने, शुगर और किडनी ठीक करने के नाम पर बाजार में चल रहे झूठे दावों और विज्ञापनों पर चिंता जताई।

उन्होंने भावी डॉक्टरों को आगाह किया कि वे केवल विज्ञापनों और आर्थिक प्रलोभन के आधार पर दवाओं का प्रयोग न करें। उन्होंने कोर्ट में पतंजलि और डाबर जैसी कंपनियों से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के मामलों का उदाहरण देते हुए चिकित्सकों को अपने विवेक और व्यावहारिक अनुभव के आधार पर ही इलाज करने की सलाह दी।

संकाय प्रमुख ने दिलाई जिम्मेदारियों की याद

कार्यक्रम में संकाय प्रमुख प्रोफेसर के. एन. मूर्ति ने इंटर्न्स को संबोधित करते हुए कहा कि आज समाज में आयुर्वेद डॉक्टरों की प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी काफी बढ़ी है। ऐसे में सभी आयुर्वेद स्नातकों को NCISM द्वारा दिए गए अधिकारों और कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए।

इस कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर सी. एस. पांडे रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर सुनंदा पाटेकर, डॉ. शिखा सिंह और डॉ. शालिनी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सुश्री शैलजा द्वारा प्रस्तुत किया गया।