Movie prime
PMC_Hospital

BHU: ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह को पद से हटाने की मांग, छात्र नेता ने कुलपति को संबोधित सौंपा ज्ञापन

लोकायुक्त जांच का हवाला देकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग; छात्रों ने कहा- पद पर रहते प्रभावित हो सकते हैं साक्ष्य

Ad

 
fff
WhatsApp Group Join Now

Ad

लोकायुक्त समन का हवाला, निष्पक्ष जांच की मांग


कुलपति को संबोधित ज्ञापन में छात्र नेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने उल्लेख किया है कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन द्वारा ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग और आयुष्मान भारत योजना में कथित गड़बड़ियों के आरोपों का संज्ञान लिया गया है। इस मामले में माननीय उप लोकायुक्त कार्यालय ने बीती 29 अप्रैल 2026 को एक समन जारी कर संबंधित अधिकारी से अभिलेख, तथ्यात्मक आख्या और शपथपत्र सहित स्पष्टीकरण तलब किया है।

Ad
Ad

छात्रों का कहना है कि लोकायुक्त कार्यालय किसी भी मामले में प्रारंभिक जांच तभी शुरू करता है, जब शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया (Prima Facie) जांच योग्य तथ्य पाए जाते हैं। समन जारी होना यह स्पष्ट करता है कि आरोपों में गंभीरता है।


पद पर रहते साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका

Ad


कुलपति कार्यालय को सौंपे गए पत्र में छात्रों ने चिंता जताई है कि वर्तमान में डॉ. सौरभ सिंह ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी पद पर काबिज हैं। उनके प्रशासनिक नियंत्रण में कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, खरीद संबंधी पत्रावलियां, आयुष्मान भारत योजना से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और अधीनस्थ कर्मचारी आते हैं।

Ad

डॉ. मृत्युंजय तिवारी, छात्र नेता (BHU) ने बताया कि, जब तक डॉ. सौरभ सिंह अपने पद पर बने रहेंगे, तब तक निष्पक्ष, स्वतंत्र और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना संभव नहीं होगा। साक्ष्यों के संरक्षण और पारदर्शिता के लिए उन्हें तुरंत इस प्रशासनिक दायित्व से पृथक किया जाना चाहिए।"


विश्वविद्यालय की गरिमा और पारदर्शिता पर जोर

छात्रों ने कुलपति से अपील की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन संस्थान की गरिमा, पारदर्शिता और जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए इस गंभीर प्रशासनिक मामले में त्वरित और उचित कार्रवाई करे। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से छात्र नेता मृत्युंजय तिवारी के साथ विश्वविद्यालय के दर्जनों छात्र और शोध छात्र मौजूद रहे। इस संबंध में अब कुलपति कार्यालय के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

हालांकि, उप लोकायुक्त जांच के मामले में अधिकार क्षेत्र बाधित होने के कारण शिकायत को रद्द किया जा चुका है।