झांकियों में सजी बीएचयू के 111 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, स्थापना दिवस शोभायात्रा में जमकर झूमे छात्र
स्थापना दिवस पर 31 झांकियों में दिखा बीएचयू का कल, आज और भविष्य; महामना और मां सरस्वती के स्वरूप में नजर आए छात्र
वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के 111वें स्थापना दिवस पर शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में परंपरा, अनुशासन और सांस्कृतिक गौरव का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर 31 झांकियों के माध्यम से बीएचयू के 111 वर्षों का इतिहास, वर्तमान उपलब्धियां और भविष्य की परिकल्पना प्रस्तुत की गई।


स्थापना दिवस के मौके पर निकली पारंपरिक शोभायात्रा इस बार बिना डीजे के, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ निकाली गई, जिसने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया।


स्थापना स्थल पर विधि-विधान से हुआ पूजन
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर बीएचयू के स्थापना स्थल पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे एलडी गेस्ट हाउस के सामने बने मंच से कुलपति ने शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाई।

इस अवसर पर आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. ए.के. त्यागी, कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल सहित अनेक शिक्षाविद और अधिकारी उपस्थित रहे।



झांकियों में दिखा बीएचयू का कल, आज और भविष्य
शोभायात्रा में शामिल झांकियों ने बीएचयू की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और शोध परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

- संस्कृत विभाग की झांकी में भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद और दर्शन की झलक दिखाई दी।
- वैदिक विज्ञान केंद्र के छात्रों ने वैदिक जल शोधन और वैदिक गणित की पद्धतियों को झांकी के माध्यम से प्रदर्शित किया।
- आईएमएस बीएचयू के छात्रों ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और उपचार प्रणाली को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।


महामना और मां सरस्वती के रूप में सजे छात्र
स्थापना दिवस के अवसर पर कई छात्र-छात्राएं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय और मां सरस्वती के स्वरूप में नजर आए। एक छात्रा ने सफेद साड़ी पहनकर, हाथ में वीणा और सिर पर मुकुट धारण कर मां सरस्वती का सजीव रूप प्रस्तुत किया, जो आकर्षण का केंद्र बना रहा।


कुलपति ने याद दिलाया बीएचयू का इतिहास
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि 1916 में बसंत पंचमी के ही दिन महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना की थी। बीएचयू न केवल एक विश्वविद्यालय है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त केंद्र है।
डीजे पर रोक, यातायात व्यवस्था सख्त
स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तेज आवाज में डीजे बजाने पर रोक लगाई गई थी। साथ ही परिसर में यातायात प्रतिबंध भी लागू रहा। प्रशासन ने छात्रों और आगंतुकों से नियमों का पालन करने की अपील की।
हालांकि नोटिस के बावजूद कुछ स्थानों पर छात्रों द्वारा भोजपुरी गीतों पर नृत्य किए जाने की भी खबर सामने आई, लेकिन प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखा।
