वाराणसी: कंदवा में नगर निगम का बड़ा एक्शन, 15 करोड़ की सरकारी जमीन मुक्त; महिलाओं ने लगाया अभद्रता का आरोप
बुलडोजर कार्रवाई पर महिलाओं का फूटा गुस्सा, पुलिस पर अभद्रता और बर्बरता का आरोप; पीड़ित बोले- "घर में शादी है, कहाँ जाएंगे?"
वाराणसी (भदैनी मिरर): वाराणसी के कंदवा क्षेत्र में गुरुवार को नगर निगम का बुलडोजर जमकर गरजा। एक तरफ जहां नगर निगम ने हाईवे से सटी करीब 15 करोड़ रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने का दावा किया, वहीं दूसरी ओर बरूईपुर कंदवा की यादव बस्ती में इस कार्रवाई का भारी विरोध हुआ। स्थानीय महिलाओं ने पुलिस और प्रशासनिक टीम पर बर्बरता और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगाए हैं।


नगर निगम का पक्ष: न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, कंदवा स्थित आराजी नंबर 918 घ पर लंबे समय से अवैध कब्जा था। हाईवे किनारे स्थित इस आठ बिस्वा जमीन पर दबंगों ने कच्ची दीवार और टीनशेड डालकर कब्जा कर रखा था।
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अदालती फैसला: यह मामला चकबंदी न्यायालय में विचाराधीन था, जिसने हाल ही में इस भूमि को 'बंजर' और शासकीय संपत्ति घोषित कर दिया।
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बड़ी रिकवरी: नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त संगम लाल और सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव के नेतृत्व में टीम ने अवैध निर्माण को ध्वस्त कर 15 करोड़ की जमीन वापस ली।
पीड़ितों का छलका दर्द: "गर्भवती महिला को भी नहीं बख्शा"
घटनास्थल पर मौजूद सुनीता यादव ने रोते हुए बताया कि प्रशासन की यह कार्रवाई पूरी तरह बर्बर है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के साथ सादे कपड़ों में आए अनजान लोगों ने धक्का-मुक्की और अभद्रता की। आरोप है कि एक गर्भवती महिला संग भी अभद्रता और बुजुर्गों के साथ भी बदसलूकी की गई। सुनीता के अनुसार, आगामी 19 जून को घर में बेटी की शादी है, लेकिन प्रशासन ने 10 दिन की मोहलत भी नहीं दी। पीड़ितों का दावा है कि मामला हाईकोर्ट में चल रहा है और स्टे मिलने वाला था, लेकिन उससे पहले ही घर गिरा दिया गया।

250 परिवार और 50 गायों का संकट
कार्रवाई से प्रभावित लोगों का कहना है कि इस बस्ती में लगभग 250 परिवार रहते हैं, जिनमें छोटे-छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। घर टूटने के बाद अब इन परिवारों के सामने रहने और अपनी लगभग 50 गायों को संभालने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने पार्षद पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है।

नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए यह अभियान चलाया गया था। पूर्व में कई बार नोटिस और चेतावनी दी जा चुकी थी, लेकिन कब्जा न हटाए जाने पर विवश होकर बुलडोजर की कार्रवाई करनी पड़ी।
