Bakrid News: काशी में संपन्न हुई बकरीद की नमाज, 700 मस्जिदों में ड्रोन से निगरानी; प्रतिबंधित पशुओं पर सख्त एक्शन की चेतावनी
मुल्क में अमन-चैन की मांगी गई दुआ, सोशल मीडिया पर कुर्बानी के वीडियो-फोटो डालने पर मौलानाओं ने जताई आपत्ति
वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में आज ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पावन पर्व बेहद शांतिपूर्ण, गरिमामय और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। जनपद के विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह के वक्त अकीदतमंदों ने नमाज अदा की और हाथ उठाकर मुल्क में अमन, चैन, तरक्की और आपसी भाईचारा कायम रखने की विशेष दुआ मांगी। इस दौरान काशी की चिर-परिचित 'गंगा-जमुनी तहजीब' की एक बेहद खूबसूरत मिसाल देखने को मिली, जहां हिंदू-मुस्लिम एकता के साथ लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर पर्व की बधाई दी।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े दिशा-निर्देशों के पालन में वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा, जिसके चलते पूरी नमाज और उत्सव सकुशल संपन्न हुआ।

सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम: 700 मस्जिदों और 80 ईदगाहों पर कड़ा पहरा
वाराणसी के अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) शिव हरी मीणा ने सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

सुरक्षा व्यवस्था की मुख्य बातें:
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ड्रोन और सीसीटीवी से नजर: बनारस की सभी 700 मस्जिदों और 80 ईदगाहों के आसपास सुरक्षा के कड़े पहरे रहे। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों और तीसरी आंख (CCTV) से चप्पे-चप्पे पर निगरानी की जा रही है।
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सड़क पर नमाज न होने की गाइडलाइन: थानों और केंद्रीय स्तर पर पीस कमेटी की बैठक कर पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि नियमों के तहत कोई भी धार्मिक कार्यक्रम या नमाज सड़क पर यातायात बाधित करके नहीं की जाएगी, जिसका पूरी तरह पालन हुआ।
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सोशल मीडिया सेल एक्टिव: पुलिस की सोशल मीडिया सेल 24 घंटे हर पोस्ट पर नजर रख रही है ताकि कोई भ्रामक या आपत्तिजनक कंटेंट न फैलाया जा सके। ट्रैफिक व्यवस्था को भी इस तरह मैनेज किया गया कि आम जनता को कोई असुविधा न हो।

कड़ी चेतावनी: प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूर्णतः रोक है। यदि कहीं से भी ऐसी कोई जानकारी या शिकायत मिलती है, तो संबंधितों के खिलाफ तत्काल बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इमाम मौलाना जियाउल रहमान ने दी नसीहत— "सोशल मीडिया पर न डालें कुर्बानी की तस्वीरें"
लाट सरैया स्थित प्रसिद्ध ईदगाह मस्जिद के इमाम व खतीब मौलाना जियाउल रहमान ने नमाज के बाद कौम और देशवासियों को विशेष पैगाम दिया। उन्होंने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के 4500 साल पुराने त्याग और बलिदान के इतिहास को याद करते हुए दो बेहद महत्वपूर्ण बातें कहीं:

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स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान: मौलाना ने अपील की कि कुर्बानी के बाद अवशेष या मलबा खुले में न फेंकें। प्रशासन द्वारा तय की गई जगहों और कूड़ेदानों का ही इस्तेमाल करें ताकि "स्वच्छ काशी, सुंदर काशी" का संकल्प पूरा हो सके।
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सोशल मीडिया पर पाबंदी: उन्होंने सोशल मीडिया पर कुर्बानी की तस्वीरें या वीडियो अपलोड करने को बेहद गलत बताया। मौलाना ने कहा, "यह आपकी व्यक्तिगत इबादत है, इसे सोशल मीडिया पर न जाने दें। इससे गलत संदेश जाता है। सभी मुसलमान भाइयों से अपील है कि ऐसी कोई भी वीडियो इंटरनेट पर न डालें।"


"एक तरफ आरती, दूसरी तरफ नमाज"— यही है असली काशी
मस्जिदों से नमाज पढ़कर निकले अकीदतमंदों ने मीडिया से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए गए प्रबंधों की सराहना की। नमाजियों ने भावुक होते हुए कहा:
"काशी की यही तो असली पहचान है, जहां एक तरफ मंदिरों में घंटों की गूंज और आरती होती है, तो दूसरी तरफ मस्जिदों में अजान और नमाज अदा की जाती है। यहीं से पूरे देश को हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का संदेश जाता है।"

