काशी की सड़कों पर 'बाहुबली ट्रक' का महा-सफर: 308 पहियों और 200 टन वजन के साथ वाराणसी से गुजरा विशालकाय वाहन
बेल्जियम से लखीमपुर खीरी जा रहा विशालकाय हाइड्रोलिक ट्रेलर; साइन बोर्ड हटाए गए, 14 गाड़ियों और सुरक्षा घेरे के बीच कछुए की चाल से तय हुआ सफर
वाराणसी। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक कौतूहल का केंद्र बना 308 पहियों वाला विशालकाय 'बाहुबली ट्रक' (हाइड्रोलिक मॉड्यूलर ट्रेलर) बुधवार को वाराणसी में कड़ी सुरक्षा और रूट डायवर्जन के बीच आगे बढ़ा। चंदौली मार्ग से वाराणसी सीमा में दाखिल हुआ यह महा-ट्रक प्रयागराज से वाराणसी जाने वाली नेशनल हाईवे उल्टी दिशा से राजातालाब होते हुए रखौना रिंग रोड पहुंचा, जहां से इसे हरहुआ मार्ग की ओर रवाना किया गया। वाहन के असाधारण आकार और वजन को देखते हुए प्रशासन को इसे हाइवे पर कई किलोमीटर तक उल्टे लेन (रिवर्स साइड) से गुजारना पड़ा।



रिवर्स लेन में संचालन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
अति-विशिष्ट और भारी वाहन होने के कारण हाइवे तथा रिंग रोड पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। विशाल आकार के चलते सामान्य मोड़ों पर मुड़ने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए प्रयागराज-वाराणसी हाइवे पर राजातालाब-रखौना रूट पर ट्रक को उल्टे लेन से ले जाया गया। इस दौरान हाईवे पर साइन बोर्ड को बाहुबली ट्रक के साथ लगे इंजीनियर और कर्मचारी उसको खोल कर क्रेन की मदद से हटवाया जिसके बाद आगे ले जाया गया। यात्रा के दौरान किसी दुर्घटना या ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए एसीपी ट्रैफिक प्रवीण कुमार के नेतृत्व में राजातालाब थाना और मिर्जामुराद थाना पुलिस की टीमें काफिले के साथ आगे-पीछे सुरक्षा कवच बनाकर चलती रहीं।

अस्थायी बैरिकेडिंग और डायवर्जन:
हाइवे पर अन्य गाड़ियों की रफ्तार को नियंत्रित करने के लिए कुछ हिस्सों पर वन-वे ट्रैफिक लागू किया गया।

बाहुबली ट्रक की मुख्य विशेषताएं | विवरण:
इसमें कुल पहिये (Tyres) | 308 पहिये (20 से अधिक मॉड्यूलर ट्रॉलियां आपस में जुड़ीं) वाहन की लंबाई व ऊंचाई लगभग 100 फीट लंबा और 20 फीट से अधिक ऊंचा लोड किया गया वजन लगभग 200 टन वाहन की रफ्तार 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा (कछुए की चाल)

क्या लोड है?
बेल्जियम से आयातित वैक्यूम बॉयलर/रिएक्टर वेसल अंतिम गंतव्य लखीमपुर खीरी (एशिया के पहले बायो-प्लास्टिक / एथेनॉल प्लांट हेतु) जा रही है।
चुनौतियां: बिजली के तार, पोल और फुट ओवरब्रिज इस ट्रक को सुरक्षित निकालने के लिए सड़कों पर विशेष सिविल और मैकेनिकल कार्य करने पड़े: डाफी टोल प्लाजा और संकरे इलाकों में इसे निकालने के लिए करीब 300 मीटर तक का नया वैकल्पिक रास्ता और गिट्टी बिछाकर ट्रैक तैयार किया गया। रास्ते में पड़ने वाले बिजली के ओवरहेड तारों को काटा या ऊपर उठाया गया। इसके अलावा, रास्ते में आ रहे फुट ओवरब्रिज के हिस्सों को क्रेन की मदद से अस्थायी रूप से ऊपर उठाया गया, जिन्हें ट्रक गुजरने के बाद पुनः ठीक किया जाएगा।
तकनीकी टीम का काफिला:
ट्रक के साथ 14 अन्य गाड़ियां चल रही हैं। इनमें 2 जेसीबी, 2 हाइड्रा क्रेन, सिविल-मैकेनिकल इंजीनियर्स की टीमें और हाई-वोल्टेज वायर चेक करने वाले वाहन शामिल हैं। यह 200 टन वजनी वेसल बेल्जियम से समुद्री जहाज द्वारा ओडिशा के पारादीप पोर्ट लाया गया। सड़क मार्ग: पारादीप से निकलकर यह झारखंड, बिहार (कैमूर, औरंगाबाद) और यूपी के चंदौली होते हुए वाराणसी पहुंचा। आगे का रास्ता: हरहुआ रिंग रोड से गुजरते हुए यह काफिला गाजीपुर सीमा में दाखिल होगा और वहां से लखीमपुर खीरी के लिए आगे बढ़ेगा।
308 पहियों वाले इस अनोखे वाहन को देखने के लिए बनारस और आसपास के जिलों से हजारों लोगों की भीड़ नेशनल हाइवे पर उमड़ रही है।
