काशी में बोले बाबा रामदेव- 'सनातन को गाली देने वालों की हो चुकी अंत्येष्टि, अब तर्पण की तैयारी'; BHU में योग के साथ भरी हुंकार
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में जुटे देशभर के दिग्गज संत; रामदेव ने उदयनिधि स्टालिन के बयान पर साधा निशाना, पीएम मोदी और सीएम योगी की जमकर की तारीफ
वाराणसी [भदैनी मिरर]: धर्म की नगरी काशी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के स्वतंत्रता भवन में आज 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के तहत आध्यात्मिक संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने चिरपरिचित अंदाज में सनातन विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि जिन लोगों ने सनातन धर्म को खत्म करने का सपना देखा या इसे गालियां दीं, उनकी राजनीतिक अंत्येष्टि हो चुकी है।


सनातन विरोधियों का होगा 'राजनीतिक मोक्ष'
तमिलनाडु के नेता उदयनिधि स्टालिन के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए बाबा रामदेव ने कहा, "शिव की नगरी में हम संतों के अमृत वचन सुनने आए हैं। कुछ राजनीतिक पार्टियों ने सनातन को गालियां दीं, उनकी अंत्येष्टि तो हो गई, अब श्रद्धांजलि और तर्पण भी बहुत जल्द हो जाएगा।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग अपना वजूद बचाना चाहते हैं, वे सनातन का अपमान बंद करें, वरना उनका 'राजनीतिक मोक्ष' सुनिश्चित है।

मंच पर भाषण के साथ योग की मुद्राएं
कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव का एक अलग रूप भी देखने को मिला। भाषण देते-देते वे मंच पर ही योग करने लगे, जिसे देख पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु बनने की राह पर है और इसमें योग व अध्यात्म की बड़ी भूमिका है।
पीएम मोदी और सीएम योगी को बताया 'यशस्वी'
बाबा रामदेव ने देश और प्रदेश के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा, "आजादी के बाद उत्तर प्रदेश को ऐसा यशस्वी मुख्यमंत्री मिला है जो सनातन को जीता है। वहीं, देश को ऐसे प्रधानमंत्री मिले हैं जो शासन व्यवस्था को भारतीय संस्कृति और धर्म के अनुरूप चला रहे हैं। हमें पीएम मोदी पर गर्व है।"

देशभर के संतों का हुआ जमावड़ा
कार्यक्रम का शुभारंभ महिलाओं और बटुकों द्वारा पुष्प वर्षा और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी में प्रमुख रूप से:
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स्वामी अवधेशानंद गिरि (आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा)
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स्वामी चिदानंद सरस्वती (परमार्थ आश्रम, ऋषिकेश)
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जगद्गुरु वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज
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स्वामी भद्रेशदास (स्वामीनारायण मंदिर, गुजरात)
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स्वामी आशुतोषानंद गिरी (निरंजनी अखाड़ा) सहित कई अखाड़ों के महामंडलेश्वर और साध्वी देवप्रिया उपस्थित रहीं।
संगोष्ठी में संतों ने भारत को आध्यात्मिक शक्ति बनाने और सांस्कृतिक गौरव को पुनः स्थापित करने पर अपने विचार साझा किए।


