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श्रीराम जन्मभूमि चंदा प्रकरण पर आचार्य अशोक द्विवेदी का बड़ा बयान: "प्राण प्रतिष्ठा तक जुड़े लोग देश से मांगें माफी,

काशी विश्वनाथ न्यास के पूर्व अध्यक्ष ने उठाए गंभीर सवाल; कहा- अयोध्या ही नहीं, काशी, केदारनाथ और तिरुपति में भी वेबसाइट पर अपलोड हो चढ़ावे का साप्ताहिक विवरण

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वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): श्रीराम जन्मभूमि में चंदे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात धर्माचार्य आचार्य अशोक द्विवेदी ने इस प्रकरण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को अपने रवींद्रपुरी स्थित आवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है, इसलिए इसके प्रशासनिक और आर्थिक विषयों में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही होना अत्यंत आवश्यक है।

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"न्यास के लीकेज भी पता हैं और व्यवस्था भी" 

पत्रकारों से बातचीत करते हुए आचार्य अशोक द्विवेदी ने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव को साझा किया। उन्होंने भावुक और तल्ख लहजे में कहा, "मुझे इस बात की विशेष चिंता इसलिए है क्योंकि मैं खुद काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का दो बार अध्यक्ष और दो बार ट्रस्टी रहा हूं। मैंने कुल मिलाकर 13 वर्षों तक न्यास के कार्यों को बेहद करीब से देखा है। मुझे न्यास के अनुभव भी हैं, उसके 'लीकेज' भी पता हैं और व्यवस्था कैसे चलती है, इसकी भी पूरी समझ है। इसीलिए जब आस्था के केंद्रों पर ऐसी बातें आती हैं, तो मन दुखित होता है।"

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प्राण प्रतिष्ठा तक जुड़े लोग देश से माफी मांगें 

अयोध्या में दान पेटी से जुड़े विवाद पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए आचार्य द्विवेदी ने कहा कि चोरी की जांच कराना और दोषियों को पकड़ना सरकार व पुलिस का काम है। लेकिन उन्होंने एक बड़ा बयान देते हुए कहा, "भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक जो भी लोग इस व्यवस्था में शामिल थे, उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्हें स्वीकार करना चाहिए कि कहीं न कहीं गलती हुई है और यह भरोसा देना चाहिए कि आगे से एक पूरी तरह पारदर्शी (Transparent) सिस्टम लाया जाएगा।"

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चोरी नहीं, 'विलुप्त' हुए चढ़ावे को प्रकट करे सरकार 

धर्माचार्य ने 'चोर' या 'चोरी' जैसे शब्दों को बेहद हल्का (Cheap) बताते हुए प्रयोग करने से मना किया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम के दरबार से जो चढ़ावा, चंदा या भूमि 'विलुप्त' हुई है, उस विलुप्त को प्रकट करना और जनता के सामने सच लाना सरकार का दायित्व है। सरकार को सनातन धर्मावलंबियों में यह विश्वास पैदा करना होगा कि व्यवस्था के 'लीकेज' को बंद कर दिया गया है और गड़बड़ी करने वालों को कड़ा दंड मिला है।

अयोध्या ही नहीं, देश के सभी बड़े मंदिरों का ऑडिट हो पब्लिक 

आचार्य अशोक द्विवेदी ने केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए एक समान पारदर्शी व्यवस्था की मांग की। उन्होंने कहा कि पारदर्शी सिस्टम सर्वत्र होना चाहिए:

  • श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी)

  • बाबा केदारनाथ मंदिर (उत्तराखंड)

  • महाकाल मंदिर (उज्जैन)

  • सिद्धि विनायक मंदिर (मुंबई)

  • तिरुपति बालाजी मंदिर (आंध्र प्रदेश)

उन्होंने मांग उठाई कि इन सभी बड़े मंदिरों की वेबसाइट पर साप्ताहिक (Weekly) विवरण अपलोड होना चाहिए, जिसमें यह साफ-साफ दर्ज हो कि एक हफ्ते में कितना सोना, कितनी चांदी, कितना धातु अर्पण हुआ और कितने नोट व नकद पैसे आए।

आस्था पर चोट लगने से श्रद्धालुओं को नींद नहीं आती 

आचार्य द्विवेदी ने कहा कि भारत एक बेहद आस्थावान और श्रद्धालु देश है। जब लोगों की श्रद्धा पर कोई आघात लगता है, तो भक्तों को नींद नहीं आती। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर कीचड़ उछालना या आरोप लगाना नहीं है, बल्कि वह चाहते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो। यदि आरोप सही हैं तो कठोरतम कार्रवाई हो और यदि निराधार हैं तो भी सच सामने आए ताकि अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

धार्मिक स्थलों के चढ़ावे और आय-व्यय को हर हफ्ते वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की आचार्य अशोक द्विवेदी की इस मांग से आप कितने सहमत हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें।