BHU में चीफ़ प्रॉक्टर को हटाने की माँग पर ABVP का आंदोलन हुआ उग्र, 16वें दिन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र
बीएचयू केंद्रीय कार्यालय के समक्ष अभाविप कार्यकर्ताओं का आमरण अनशन; परिसर सुरक्षा, भ्रष्टाचार और फर्जी मुकदमे वापस लेने की 10-सूत्रीय माँगों को लेकर आर-पार की जंग।
वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रों की सुरक्षा, कैंपस की गरिमा और न्याय व्यवस्था को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का आंदोलन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। पिछले 15 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल न होने पर 16वें दिन आंदोलनकारी छात्र आमरण भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

बीएचयू केंद्रीय कार्यालय के समक्ष चल रहे इस अनशन में अभाविप इकाई के अध्यक्ष पल्लव सुमन, इकाई मंत्री अनुराग तिवारी, डॉ. सत्यनारायण सिंह, अर्पण राघव और पुनीत मिश्रा मुख्य रूप से भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक भ्रष्ट और छात्रविरोधी चीफ प्रॉक्टर को पद से नहीं हटाया जाता, यह जंग जारी रहेगी।
"खून से पत्र लिखा, शव प्रदर्शन किया, फिर भी संवेदनहीन रहा प्रशासन"
भूख हड़ताल पर बैठे बीएचयू इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि छात्र पिछले 16 दिनों से पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे थे। खून से पत्र लिखने और प्रतीकात्मक शव प्रदर्शन के माध्यम से ध्यान खींचने की कोशिश की गई, लेकिन प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय बना रहा।
पल्लव सुमन ने आरोप लगाया कि चीफ प्रॉक्टर की शह पर कैंपस में बाहरी और असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे छात्र-छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि अब यह लड़ाई निर्णायक दौर में पहुँच चुकी है।
10-सूत्रीय मांगों को लेकर अड़े छात्र, फर्जी मुकदमे रद्द करने की मांग
इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष 10-सूत्रीय मांगें रखीं। उन्होंने प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए कहा:
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परिसर में खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों और स्ट्रीट लाइटों को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
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ऑडिटोरियम आवंटन प्रक्रिया में हुई प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितताओं की जांच हो।
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विरोध जताने वाले निर्दोष छात्रों पर दर्ज किए गए फर्जी मुकदमों को अविलंब वापस लिया जाए।
अनुराग तिवारी ने कहा कि डॉ. सत्यनारायण सिंह, अर्पण राघव और पुनीत मिश्रा समेत सभी कार्यकर्ता जान की बाजी लगाकर मैदान में डटे हैं और प्रशासन को छात्रों के हित में झुकना ही पड़ेगा।
स्वास्थ्य बिगड़ा तो जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी
संयुक्त रूप से बयान जारी करते हुए अनशनकारी कार्यकर्ताओं ने कहा कि वर्तमान प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने बीएचयू जैसी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था की साख को भारी नुकसान पहुँचाया है। छात्रों के अधिकारों को दबाने के लिए लगातार अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाइयों का डर दिखाया जा रहा है।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि आमरण अनशन के दौरान यदि किसी भी अनशनकारी छात्र के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचता है, तो इसकी पूरी नैतिक व कानूनी जवाबदेही बीएचयू प्रशासन और चीफ प्रॉक्टर की होगी। अभाविप ने बीएचयू के समस्त छात्र समुदाय से एकजुट होकर इस अभियान का समर्थन करने का आह्वान किया है।
