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राष्ट्रीय महिला आयोग ने की BHU ट्रामा सेंटर प्रभारी को हटाने की अनुशंसा, आंतरिक समिति के पुनर्गठन के निर्देश, देखें आर्डर कॉपी 

आयोग ने कुलपति बीएचयू को 4 सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा, 14 जुलाई को आयोग ने किया था तलब 

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वाराणसी, भदैनी मिरर डेस्क| बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कार्यरत एक महिला डॉक्टर मंजरी मिश्रा के कार्यस्थल पर उत्पीड़न की शिकायत के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आदेश जारी किया है। आयोग ने 14 जुलाई 2025 को हुई सुनवाई के बाद कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं, जिनमें आंतरिक समिति के पुनर्गठन से लेकर बीएचयू ट्रामा सेंटर प्रभारी को हटाने तक की अनुशंसा शामिल है।

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क्या है मामला?

डॉ. मंजरी मिश्रा ने ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी (विभागाध्यक्ष) डॉ. सौरभ सिंह और उनके बाउंसर आशीष सिंह पर मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि 26 मई 2025 को हुई एक विशेष घटना के संबंध में उन्हें सीसीटीवी फुटेज तक नहीं दिया गया, जबकि इस बारे में उन्होंने कुलपति और निदेशक को कई बार पत्र लिखा।

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महिला आयोग के समक्ष क्या हुआ?

14 जुलाई को आयोग में हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित थीं। BHU की ओर से IMS निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार और महिला शिकायत प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. रोयाना सिंह ने पक्ष रखा। सुनवाई में यह बात सामने आई कि शिकायतकर्ता BHU की आंतरिक समिति में शिकायत नहीं करना चाहतीं, क्योंकि उनका कहना है कि मामला यौन उत्पीड़न से जुड़ा नहीं है।

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आयोग के निर्देश क्या हैं?

आयोग ने सुनवाई के बाद BHU प्रशासन को निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

1. शिकायतकर्ता को BHU की आंतरिक समिति के समक्ष नई शिकायत दर्ज करने का निर्देश।
2. आंतरिक समिति के पुनर्गठन की अनुशंसा, क्योंकि विश्वविद्यालय से इस तरह की कई शिकायतें आयोग को मिल रही हैं।
3. डॉ. मंजरी मिश्रा के मामले की जांच नवगठित समिति द्वारा की जाए।
4. ट्रॉमा सेंटर में नए विभागाध्यक्ष की नियुक्ति की सिफारिश।
5. जांच पूरी होने तक डॉ. सौरभ सिंह और डॉ. मंजरी मिश्रा को अलग-अलग कार्यस्थलों पर तैनात किया जाए।
6. 26 मई की घटना का सीसीटीवी फुटेज शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराया जाए।
7. BHU प्रशासन चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपे।

BHU प्रशासन की प्रतिक्रिया

BHU अधिकारियों ने आयोग को बताया कि 26 मई की घटना के सीसीटीवी फुटेज में कोई स्पष्ट दुर्व्यवहार नहीं दिखा। साथ ही यह भी बताया गया कि नवंबर 2024 में IMS में लैंगिक उत्पीड़न समिति गठित की गई थी, और किसी भी विभागाध्यक्ष को केवल कुलपति के निर्देश पर हटाया जा सकता है।

देखें आर्डर कॉपी 

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