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जिस अस्पताल को किया गया था सील, उसी में प्रसव के लिए आई महिला की हो गई मौत

परिजनों ने किया जमकर हंगामा, तोड़फोड़ के दौरान संचालक और कर्मचारी भागे

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महराजगंज में अवैध ढंग से संचालित अस्पताल को लेकर उठने लगे सवाल

महराजगंज। जिस निजी अस्पताल को अनियमितता के मामले में अवैध मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीन साल पहले सील कर दिया था, उसका नाम बदलकर दोबारा रजिस्ट्रेशन कराकर संचालित किया जा रहा था। उसी अस्पताल में प्रसव के लिए आई महिला की शनिवार को मौत हो गई। इससे बौखलाये परिजनों ने हंगामा करते हुए तोड़फोड़ की। हंगामा देख अस्पताल संचालक और कर्मचारी भाग निकले। सूचना पर पुलिस पहुंची तो जांच में यह मामला सामने आया। पुलिस ने किसी तरह परिजनों को समझाकर मामले को शांत कराया। अब इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों में गहरा आक्रोश है। 

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महराजगंज जिले के श्यामदेउरवां क्षेत्र के लखिमा गांव के सुनील कुमार ने गुलरिहा पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी रीतू प्रसव के लिए अपने मायके परसौना आई थी। शनिवार सुबह नौ बजे प्रसव पीड़ा होने पर मायके पक्ष के लोग उसे तरकुलहां चौराहा स्थित निजी अस्पताल ले आये। आरोप है कि अस्पताल पहुंचते ही संचालक ने इलाज शुरू करने से पहले 40 हजार रुपये जमा करा लिए। कुछ देर के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी। इस पर परिजनों ने डाक्टरों से पूछा तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इस दौरान महिला की और हालत गंभीर हो गई। इसके बाद अस्पताल संचालक ने बिना परिजनों को बताए उसकी पत्नी को अपने निजी वाहन में बैठाया और बीआरडी मेडिकल कालेज के गेट पर छोड़कर फरार हो गया। परिजन पहुंचे तो रीतू की मौत हो चुकी थी। रीतू की मौत से परिजन बौखला गये।

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परिजन अस्पताल पहुंचकर हंगामा करते हुए तोड़फोड़ करने लगे। सूचना पर सीओ गोरखनाथ और गुलरिहा थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। परिवार वालों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को शांत कराया। मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी गई। प्रकरण की जांच में पता चला कि तीन साल पहले इसी भवन में संचालित अस्पताल को अवैध मानते हुए एडिशनल सीएमओ डा. अनिल सिंह की मौजूदगी में सील कर दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग की सील किये जा चुके अस्पतालों की सूची में आज भी इस भवन का नाम दर्ज है। इसके बाद भी इसका नाम बदला गया और दोबारा रजिस्ट्रेशन भी हो गया। अब यह फिर से संचालित हो रहा था। अब इस नये प्रकरण से स्वास्थ्य विभाग पर सवालिया निशान लग गये हैं। 

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