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साइबर अपराध की चुनौतियों से लड़ने के लिए वाराणसी जोन की पुलिस तैयार

बैंक एकॉउण्ट फ्रीज करने में दस घंटे के वजाय अब लगा रहा 20 मिनट का समय

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साइबर फ्राडों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिसकर्मियों को दिया जा रहा साइट्रेन कोर्स का प्रशिक्षण

वाराणसी, भदैनी मिरर। वाराणसी जोन की पुलिस ने कानून व्यवस्था सुदृढ़ीकरण, जन सुरक्षा, तकनीकी नवाचारों एवं अन्य उल्लेखनीय जनोन्मुख गतिविधियों द्वारा शांति व्यवस्था व अपराध नियंत्रण की चुनौतियों से निपटने के लिए कमर कस ली है। अपर पुलिस महानिदेशक पियूष मोर्डिया ने बताया कि साइबर अपराध वर्तमान परिदृश्य में पुलिस विभाग के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण चुनौती है। जिसकी रोकथाम हेतु जोन के जनपदों द्वारा 24x7 (8 घण्टे की शिफ्ट में) प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। किसी भी साइबर फ्रॉड की जानकारी एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होने पर जनपद के साइबर सेल द्वारा बैंको को एकॉउण्ट फ्रीज करने हेतु Sent to Intermediatory पुश (Push) करने की कार्यवाही की जाती है।

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पहले इस कार्यवाही को करने में 08 से 10 घण्टे लगा करते थे अब किये जा रहे त्वरित कार्यवाही के कारण औसत समय घटकर 20 मिनट से भी कम हो गया है। दिनांक-22.01.2026 को जनपद जौनपुर द्वारा 02 मिनट 38 सेकेण्ड के अन्दर पुश (Push) की कार्यवाही की गयी । जनपद गाजीपुर द्वारा अधिकतम 01 घण्टे 18 मिनट का समय लगा है। फ्रॉड की धनराशि के फ्रीज / बैंक में होल्ड का प्रतिशत (Lien राशि) 26% से भी अधिक हो चुका है। लियन प्रतिशत के सम्बन्ध में वाराणसी जोन पूरे प्रदेश में दिसम्बर माह में प्रथम स्थान पर रहा है तथा चोरी / गुम हुए मोबाइल को CEIR(Central Equipment Identity Register) Portal के माध्यम से बरामद कराने में दूसरे स्थान पर है। साइट्रेन प्रशिक्षण के अन्तर्गत जोन वाराणसी मे कुल 4284 पुलिस कर्मियों द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया जा चुका है तथा अभी भी प्रशिक्षण की कार्यवाही अनवरत प्रचलित है। इसमें साइट्रेन कोर्स के तीन मॉड्यूल है- 1. रिस्पॉण्डर ट्रैक 2. इन्वेस्टीगेशन ट्रैक  व 3. फॉरेंसिक ट्रैक है।

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नवाचार  (Innovative Practices) के अन्तर्गत जोन कार्यालय के सभागार में प्रतिदिन ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से साइबर अपराध सम्बन्धी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जोन के सभी जनपदों द्वारा आपस में समन्वय स्थापित कर साइबर अपराधों के सम्बन्ध में परस्पर जानकारी साझा की जा रही है। विभिन्न पोर्टलो जैसे- प्रतिबिम्ब, सहयोग, समन्वय, एनसीआरपी, सीईआईआर, आईसीजेएस आदि द्वारा साइबर अपराध के विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है। दुर्घटना रहित जनपद  (Zero Fatality District) योजना- वाराणसी जोन में सड़क दुर्घटना से होने वाले मृत्यु को घटाने तथा शून्य की ओर अग्रसर करने हेतु दुर्घटना मृत्यु रहित जनपद बनाने के लिए एक विस्तृत अभियान प्रारम्भ किया गया है । दुर्घटना रहित जनपद कार्यक्रम के अन्तर्गत जोन के प्रत्येक जनपद में 1. क्रिटिकल कॉरिडोर्स 2. क्रिटिकल क्रैश प्रोन लोकेशन्स 3. क्रिटिकल लोकेशन्स विथ ट्रैफिक वॉयलेन्स 4. क्रिटिकल पुलिस स्टेशन्स  5. क्रिटिकल मन्थ्स 6. क्रिटिकल कॉरिडोर टीम चिन्हित किये गये है। देश में सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु को घटाने एवं शून्य की ओर अग्रसर करने हेतु वाराणसी जोन सतत प्रयत्नशील है।जोन के जनपदों में चिन्हित 50 क्रिटिकल कॉरिडोर पर 84 सीसीटीवी टीमों का गठन किया गया है। कुल 356 क्रिटिकल क्रैश लोकेशन चिन्हित किये गये हैं तथा 71 स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

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सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु कट, कर्व, मोड़ एवं जंक्शन पर कुल 662 साइनेज बोर्ड लगाए गए हैं तथा 131 कट चिन्हित करके बंद करवाये गये हैं। मिशन शक्ति केन्द्र महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण उत्तर प्रदेश शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से है। प्रदेश में महिलाओं को और अधिक सुरक्षित तथा सशक्त बनाने की दिशा में थानों पर मिशन शक्ति केंद्र की स्थापना की गयी है। मिशन शक्ति का गठन पूर्ण रूप से महिला केंद्रित कार्य प्रणाली है, जिसके अन्तर्गत पुलिस थानों में पीड़िता के आगमन के समय से लेकर पुनः मानसिक एवं शारीरिक रूप से पूर्णतः सशक्त होने पर मिशन शक्ति केंद्र 360 डिग्री काउंसलिंग, मार्गदर्शन, सहयोग और संरक्षण संबंधी सेवाएं प्रदान करता है। महिला सशक्तिकरण एवं सुरक्षा हेतु जोन में 958 महिला बीट व थानों पर 188 मिशन शक्ति केन्द्रों / महिला हेल्पडेस्क स्थापित है। गौतस्करी के रोकथाम हेतु जोन के जनपदों में विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। कुल 431 अभियोग पंजीकृत कर 1,090अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। 3,434 गोवंश तथा 398 वाहन बरामद किए गए। 120अभियुक्तों के विरुद्ध गुंडा एक्ट, 355 अभियुक्तों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट तथा 123अभियुक्तों के विरुद्ध एचएस एवं 96 गैंग पंजीकरण की कार्यवाही की गई है। अपराधियों के वित्तीय लेन-देन के बैकवर्ड व फॉरवर्ड लिंकेजेस के आधार पर इनके संरक्षकों के विरुद्ध भी कार्यवाही की जा रही है।

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