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यूपी पंचायत चुनाव: हाईकोर्ट के फैसले पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान

सपा प्रमुख ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल; बोले— 'प्रशासक' बनाने के चक्कर में ग्राम प्रधानों को बहुत बुरा फंसा गई भाजपा, गांवों में होगी नाकाबंदी

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akhilesh yadav
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भदैनी मिरर, लखनऊ: उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों (UP Panchayat Chunav) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आए बड़े फैसले के बाद सूबे की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें ही प्रशासक नियुक्त करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को हाईकोर्ट द्वारा 'असंवैधानिक' बताए जाने पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार पर चौतरफा हमला बोला है।

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अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एक तरफ जहाँ उप्र की भाजपा सरकार द्वारा अपनी झूठी तारीफ के प्रायोजित कार्यक्रम लगातार करवाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार ने सरकार के दावों की हवा निकाल दी है। उन्होंने सवाल दागते हुए कहा कि अब जनता पूछ रही है कि इस तरह के 'असंवैधानिक' काम करने की सजा क्या होती है?

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'भाजपा सरकार ने प्रधानों को बहुत बुरा फंसा दिया'

सपा प्रमुख ने ग्राउंड जीरो पर पैदा होने वाले संकट का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के इस अदूरदर्शी आदेश ने ग्राम प्रधानों को बहुत बुरे चक्रव्यूह में फंसा दिया है। सरकार द्वारा प्रशासक बनाने के आदेश के बाद प्रधानों में गांवों में कुछ नए काम करने की उम्मीद जागी थी, जिसके दम पर उन्होंने जनता से कई वादे भी कर दिए थे।

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अखिलेश यादव ने कहा, "ग्रामीण क्षेत्रों की आम जनता इस तकनीकी और कानूनी पक्ष को नहीं समझती कि कोर्ट में क्या हुआ। जनता तो यही मानेगी कि प्रधान जी ने अपना वादा पूरा नहीं किया और सारा फंड, बजट और पैसा डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर मिल-बांटकर खा गए।" उन्होंने दावा किया कि इसी नाराजगी के चलते अब यही ग्राम प्रधान भाजपाइयों को गांवों में घुसने नहीं देंगे।

खर्च हुए पैसे और ठेकेदारों के भुगतान को लेकर प्रधानों में डर

पूर्व मुख्यमंत्री ने वित्तीय संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रधानों के भीतर इस बात का गहरा डर बैठ गया है कि कहीं 'इन बीच के दिनों' (प्रशासक के तौर पर कार्यकाल) में हुए खर्च का खामियाजा उन्हें अपनी जेब से न भरना पड़े। जब कोर्ट ने इस कार्यकाल को ही कानूनी रूप से गलत साबित कर दिया है, तो उस समय में खर्च हुआ पैसा भी तकनीकी रूप से अवैध माना जा सकता है। ऐसे में अंदेशा है कि कल को सरकार 'पैसा वापसी' का तुगलकी आदेश भी जारी कर सकती है।

इसके साथ ही, प्रशासक रहते हुए प्रधानों ने जिन स्थानीय ठेकेदारों को गांवों में विकास कार्य सौंपे थे, वे अब अपने बकाये बिलों के भुगतान के लिए प्रधानों का दरवाजा खटखटाएंगे।

भाजपाइयों की होगी नाकाबंदी, पंचायती राज मंत्री पर कसा तंज

भाजपा पर तीखा तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "भाजपा बनने चली थी सयानी, निपट गई उसकी ही कहानी। भाजपा अब किसी घाट की नहीं रही है।" उन्होंने विशेष रूप से पंचायती राज मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और जनता में इस फैसले को लेकर इतना आक्रोश है कि अब पंचायती राज मंत्री का गांवों में पहुँचना तो दूर, वे अपने घर से भी बाहर नहीं निकल पाएंगे। प्रधान अब गांवों में भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की नाकाबंदी करने की तैयारी में हैं।