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यूपी में पहली बार: अफसरों के बजाय ग्राम प्रधानों को मिलेगी 'प्रशासक' की कमान, सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी मंजूरी

यूपी पंचायत चुनाव टलने पर बड़ा फैसला: अब ग्राम प्रधान ही संभालेंगे 'प्रशासक' की कुर्सी, सीएम योगी ने प्रस्ताव को दी हरी झंडी

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लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के विकास कार्यों और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर योगी सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में पंचायत चुनाव होने तक अब ग्राम प्रधानों को ही 'प्रशासक' (Administrator) की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद विभाग जल्द ही इसका आधिकारिक आदेश (जीओ) जारी करने जा रहा है।

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इस फैसले के बाद प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों के मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में काम करने की अनुमति मिल जाएगी, जिससे गांवों के विकास कार्य ठप नहीं होंगे।

इतिहास में पहली बार बदला नियम: अफसरों की जगह प्रधानों पर भरोसा

उत्तर प्रदेश के पंचायती राज इतिहास में यह पहला मौका है, जब ग्राम प्रधानों को ही उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद प्रशासक नियुक्त किया जा रहा है।

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क्या था पुराना नियम: इससे पहले जब भी पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते थे, तो शासन की ओर से सरकारी अधिकारियों (जैसे एडीओ पंचायत या बीडीओ) को ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाया जाता था। लेकिन इस बार सरकार ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रधानों को ही यह जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है।

आखिर क्यों टल गए यूपी पंचायत चुनाव?

दरअसल, उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल मंगलवार, 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। नियमों के मुताबिक इससे पहले चुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन निम्नलिखित कारणों से चुनाव टल गए हैं:

  1. ओबीसी आरक्षण का पेंच: सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण की स्थिति साफ करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी हुई। हालांकि, सरकार ने 19 मई को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

  2. वोटर लिस्ट का काम अधूरा: राज्य में मतदाता सूची (Voter List) के पुनरीक्षण और नवीनीकरण का कार्य अभी भी प्रक्रिया में है।

  3. लंबा खिंच सकता है वक्त: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन सब प्रक्रियाओं को पूरा करने में लंबा समय लगेगा। संभावना यह भी जताई जा रही है कि अब पंचायत चुनाव, यूपी विधानसभा चुनाव के बाद ही संपन्न हो पाएं।

हाईकोर्ट के पूर्व जज की अगुवाई में बना 5 सदस्यीय आयोग

यूपी पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण की सीमा और सीटों के निर्धारण के लिए सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति रामऔतार सिंह की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया है।

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आयोग की टीम में शामिल सदस्य:

  • चेयरमैन: न्यायमूर्ति रामऔतार सिंह (सेवानिवृत्त जज, इलाहाबाद हाईकोर्ट)

  • सदस्य (रिटायर्ड एडीजे): बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा

  • सदस्य (रिटायर्ड आईएएस): अरविंद कुमार चौरसिया, एसपी सिंह

शासन ने इस आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए 6 महीने का कार्यकाल दिया है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही सीटों के आरक्षण की स्थिति साफ होगी और चुनाव की तारीखें तय होंगी।

ग्राम प्रधान संघ ने जताई खुशी, कहा- 'विकास कार्य नहीं होंगे प्रभावित'

सरकार के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के हजारों ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत मिली है। ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से मांग कर रहा था कि अधिकारियों के स्थान पर जनप्रतिधियों को ही प्रशासक बनाया जाए।

प्रधानों का कहना है कि जब सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता है, तो कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक व्यस्तता के कारण गांवों के जमीनी काम प्रभावित होते हैं। अब प्रधानों के पास ही कमान रहने से गांवों में विकास कार्य सुचारू और निर्बाध रूप से चलते रहेंगे।