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UP Panchayat Election: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा ग्राम प्रधान संगठन

UP Panchayat Election: इलाहाबाद HC के 3 महीने में चुनाव कराने के आदेश को SC में चुनौती देगा ग्राम प्रधान संगठन; अप्रैल 2027 तक टलने का दावा

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भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क, उत्तर प्रदेश:उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा राज्य में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के आदेश के बाद 'राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन' ने इसे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती देने का फैसला किया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह ने स्पष्ट किया है कि कई कानूनी और तकनीकी अड़चनों के कारण 3 महीने में चुनाव कराना संभव नहीं है। संगठन का दावा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अप्रैल 2027 से पहले होना मुश्किल है।

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OBC आरक्षण और मतदाता सूची की विसंगतियां बनीं मुख्य वजह

डॉ. अखिलेश सिंह ने बातचीत में कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दायर करने के लिए संगठन के पास कई ठोस आधार हैं:

  • अधूरा ओबीसी (OBC) आरक्षण आकलन: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित पिछड़ा वर्ग आयोग अभी तक सभी जिलों में आरक्षण का आकलन पूरा नहीं कर सका है। दावा है कि आयोग ने अब तक केवल 40 जिलों का ही दौरा किया है। ओबीसी प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कराना सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों का उल्लंघन होगा।

  • मतदाता सूची में 3.94 करोड़ का अंतर: संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों में लगभग 3.94 करोड़ मतदाताओं का बड़ा अंतर है।

  • फर्जी नामों का उदाहरण: लखनऊ की लतीफपुर ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट का उदाहरण देते हुए बताया गया कि नगर निगम लखनऊ की पार्षद और कार्यकारिणी सदस्य रश्मि सिंह का नाम ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में भी दर्ज है। ऐसी गंभीर गड़बड़ियों को सुधारे बिना चुनाव कराना न्यायसंगत नहीं होगा।

जनगणना, बोर्ड परीक्षाएं और SIR भी बड़ी चुनौतियां

ग्राम प्रधान संगठन के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के सामने कई व्यावहारिक समस्याएं हैं:

  1. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR): मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण की प्रक्रिया चल रही है।

  2. बोर्ड परीक्षाएं व जनगणना: आगामी महीनों में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं और जनगणना (Census) के चलते प्रशासनिक अमला व्यस्त रहेगा।

  3. विधानसभा चुनाव की तैयारियां: आगामी समय में विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं।

इन तमाम प्रशासनिक व्यस्तताओं और कानूनी अड़चनों का हवाला देते हुए संगठन का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की पूरी उम्मीद है और चुनाव प्रक्रिया अप्रैल 2027 तक टल सकती है।