UP News: अब फीते से नहीं, 'रोवर तकनीक' से होगी जमीनों की पैमाइश; 1 दिन में निपटेंगे 10 लंबित मामले
राजस्व बोर्ड ने बदला जमीन नापने का पारंपरिक तरीका; सैटेलाइट आधारित CORS नेटवर्क से सेंटीमीटर स्तर तक मिलेगी सटीक माप
कानपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्षों से लंबित जमीनों के विवादों को तेजी से निपटाने और भूमि पैमाइश में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए राजस्व विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब सूबे में जमीनों की नापजोख पारंपरिक फीते या जरीब से नहीं, बल्कि अत्याधुनिक 'रोवर तकनीक' (Rover Technology) के माध्यम से की जाएगी। इस डिजिटल और सैटेलाइट आधारित प्रणाली से न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि इंसानी गलतियों और पक्षपात की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी। शुरुआती चरण में राजस्व बोर्ड ने कानपुर को चार रोवर मशीनें उपलब्ध कराई हैं, जिन्हें जिले की सभी तहसीलों में एक-एक कर भेज दिया गया है।


एक दिन में सुलझेंगे 8 से 10 मामले, तहसीलों के चक्करों से मुक्ति
मौजूदा व्यवस्था में लेखपाल और कानूनगो द्वारा अधिकांश स्थानों पर जमीन की नाप फीते और पुराने उपकरणों से की जाती है। इस जटिल और पुरानी प्रक्रिया के कारण कई बार सीमांकन (मेढ़/बाउंड्री) को लेकर नए विवाद खड़े हो जाते हैं, जिसके चलते राजस्व न्यायालयों में मुकदमों का अंबार लगा हुआ है।

पारंपरिक तरीके से एक दिन में बमुश्किल एक या दो जमीनों की ही पैमाइश हो पाती है। लेकिन नई रोवर रिसीवर तकनीक आने के बाद प्रतिदिन 8 से 10 मामलों का निपटारा आसानी से किया जा सकेगा। अब किसानों और भू-स्वामियों को अपनी जमीन की नाप कराने के लिए महीनों तहसीलों के चक्कर नहीं काटने होंगे।

क्या है अत्याधुनिक 'रोवर तकनीक' और कैसे करती है काम?
रोवर तकनीक मूल रूप से ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) पर आधारित एक बेहद आधुनिक सर्वे प्रणाली है। इसका कार्य सिद्धांत इस प्रकार है:
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सैटेलाइट से सीधा संपर्क: इस प्रणाली में एक विशेष डिजिटल रोवर रिसीवर उपकरण होता है, जो अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स से लगातार सिग्नल प्राप्त करता है।
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CORS नेटवर्क से जुड़ाव: यह उपकरण राज्य के स्थापित सीओआरएस (Continuously Operating Reference Stations) नेटवर्क से कनेक्ट होकर काम करता है। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति (Coordinates) का अत्यंत सटीक निर्धारण होता है।
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सेंटीमीटर स्तर की सटीकता: इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन की पैमाइश में सेंटीमीटर स्तर तक की बारीक और त्रुटिहीन माप प्रदान करता है।
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डिजिटल मैप से सीधा मिलान: पैमाइश के दौरान यह मशीन सीधे सरकारी डिजिटल मैप और राजस्व अभिलेखों (भूलेख) से डेटा का मिलान करती है, जिससे सीमांकन पूरी तरह वैज्ञानिक और कानूनी रूप से प्रामाणिक बन जाता है।
आबादी वाले क्षेत्रों में भी पैमाइश होगी आसान, तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड
ग्रामीण इलाकों के खेतों के साथ-साथ घनी आबादी वाले शहरी या अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इस तकनीक के जरिए बिना किसी बाधा के आसानी से पैमाइश की जा सकेगी। रोवर तकनीक से प्राप्त होने वाले आंकड़े पूरी तरह डिजिटल होंगे, जिससे हर खेत, प्लॉट और सरकारी भूमि का एक परमानेंट डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।
भविष्य में यदि कोई विवाद होता है, तो राजस्व विभाग के पास बिना किसी हेरफेर के निष्पक्ष और सटीक रिपोर्ट पहले से मौजूद रहेगी। सरकार के इस कदम से भू-माफियाओं द्वारा की जाने वाली अवैध कब्जे की कोशिशों पर भी लगाम कसने की उम्मीद है।
