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UP: अपने ही बुने जाल में फंसे कन्नौज के ADM, कोर्ट ने एफआईआर खारिज कर एडीएम और विवेचक को किया तलब

साल 2017 के सामूहिक नकल मामले में मैनपुरी कोर्ट का बड़ा फैसला; प्रधानाचार्य को मिली क्लीन चिट, 21 जून को होगी अगली सुनवाई

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भदैनी मिरर, मैनपुरी: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और न्यायिक हलकों से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साल 2017 में मैनपुरी के घिरोर में तैनाती के दौरान एक इंटर कॉलेज के खिलाफ सामूहिक नकल का मुकदमा दर्ज कराने वाले तत्कालीन एसडीएम (जो वर्तमान में कन्नौज के एडीएम हैं) देवेंद्र सिंह अब खुद कानूनी दांवपेच में बुरी तरह घिर गए हैं।

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मैनपुरी की न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-2 ने इस मामले की सुनवाई करते हुए न सिर्फ पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को निरस्त कर दिया, बल्कि स्कूल के प्रधानाचार्य को क्लीन चिट देते हुए तत्कालीन एसडीएम देवेंद्र सिंह और मुकदमे के विवेचक रहे पुरुषोत्तम सिंह को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया है।

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क्या है पूरा मामला और 'प्रशासनिक' जाल?

यह पूरा विवाद मैनपुरी जिले के घिरोर तहसील क्षेत्र के ग्राम नगला खुशाली स्थित चौधरी राजाराम इंटर कॉलेज से जुड़ा है। साल 2017 में यूपी बोर्ड परीक्षाओं के दौरान तत्कालीन एसडीएम घिरोर देवेंद्र सिंह ने इस स्कूल के खिलाफ साजिश के तहत धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम से जुड़ी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाया था।

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स्कूल के प्रधानाचार्य कृष्णकांत ने इस एफआईआर को पूरी तरह से व्यक्तिगत रंजिश और साजिश बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी थी। प्रधानाचार्य ने अदालत के सामने तत्कालीन एसडीएम की ही दो अलग-अलग आधिकारिक रिपोर्टें पेश कर दीं, जिसने पूरे मामले का रुख पलट दिया।

रिपोर्ट का वो विरोधाभास, जिसने एडीएम को फंसाया

कोर्ट के आदेश में दर्ज तथ्यों के अनुसार, तत्कालीन एसडीएम देवेंद्र सिंह ने 20 मार्च 2017 को पहली पाली की परीक्षा के दौरान इस स्कूल का निरीक्षण किया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि 'एक-एक बेंच पर तीन-तीन बच्चे बैठे थे और सामूहिक नकल कराई जा रही थी।' इस आधार पर उन्होंने परीक्षा केंद्र को तत्काल डिबार (प्रतिबंधित) करने की संस्तुति कर दी।

लेकिन, कहानी में ट्विस्ट तब आया जब उसी दिन (20 मार्च 2017) की शाम को बतौर जोनल मजिस्ट्रेट उन्होंने अपनी दूसरी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उन्होंने इसी स्कूल में परीक्षा का आयोजन पूरी तरह से 'शांतिपूर्ण और पारदर्शी' होना दर्शाया।

यही नहीं, इसके ठीक तीन दिन बाद यानी 23 मार्च 2017 को एसडीएम ने घिरोर थाने में स्कूल के खिलाफ सामूहिक नकल की एफआईआर दर्ज करा दी।

कोर्ट ने उठाए तीखे सवाल: जब स्कूल डिबार था तो परीक्षा कैसे हुई?

अदालत ने एसडीएम की इन दोनों रिपोर्टों में साफ तौर पर बड़ा विरोधाभास पाया। कोर्ट ने बेहद कड़े सवाल उठाते हुए कहा:

  1. जब परीक्षा केंद्र को पहली पाली में ही डिबार घोषित कर दिया गया था, तो उसी दिन शाम की पाली में वहां दोबारा परीक्षा कैसे आयोजित हुई?

  2. जिस स्कूल को तीन दिन पहले ही डिबार किया जा चुका था, वहां तीन दिन बाद (23 मार्च को) दोबारा सामूहिक नकल कैसे पकड़ी जा सकती है?

विवेचक पर भी गिरा गाज, 21 जून को पेशी

अदालत ने इस मामले की जांच करने वाले विवेचक (राजस्व निरीक्षक/पुलिस अधिकारी) पुरुषोत्तम सिंह की कार्यशैली पर भी गंभीर उंगली उठाई है। कोर्ट ने कहा कि विवेचक ने मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय सिर्फ एसडीएम द्वारा दर्ज कराई गई मनगढ़ंत एफआईआर के आधार पर आंख मूंदकर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी।

अदालत ने इसे कानून का दुरुपयोग मानते हुए वर्तमान एडीएम कन्नौज देवेंद्र सिंह और विवेचक पुरुषोत्तम सिंह के खिलाफ मानहानि और गलत केस दर्ज कराने के मामले में तलबी आदेश (समन) जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 जून को नियत की गई है। इस कार्रवाई के बाद से शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप का माहौल है।