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UP: प्रदेश की आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बढ़ेगा मानदेय, सीएम योगी ने की घोषणा

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां महीनों से कर रही हैं आंदोलन

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asha workar
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सीएम ने कहा- शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही है सरकार

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए विधान परिषद में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की। इससे पहले पिछले दिनों विधानसभा में वृद्धावस्था, दिव्यांगजन और निराश्रित विधवा महिला पेंशन की राशि बढ़ाने की घोषणा की थी।

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गौरतलब है कि वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के अलावा विभिन्न प्रदेशों में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां मानदेय बढ़ाने समेत सेवा में स्थायी करने आदि की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। वाराणसी में उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने बकाया मानदेय, प्रोत्साहन राशि और उत्पीड़न के खिलाफ सीएमओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का भी मानदेय बढ़ाएंगे। शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। हाल ही में शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों, शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा हुई है। एक अप्रैल से इसका लाभ भी मिलने लगेगा। इसमें पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा निःशुल्क उपलब्ध होगी। कहाकि हमारी सरकार तुष्टीकरण नहीं संतुष्टीकरण कर रही है। बताया कि हमने छह करोड़ लोगों को गरीबी से ऊपर उठाया है। पहले कहा जाता था कि देख सपाई, बिटिया घबराई। किंतु अब ऐसा नहीं है। अब बेटियां रात की शिफ्ट में भी काम करके सुकून से घर जाती हैं।

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उन्होंने कहा कि विकास की पहली शर्त ‘रूल ऑफ लॉ’ है और इसी लक्ष्य को पाने के लिए सरकार ने मजबूती से काम किया। रिकॉर्ड स्तर पर पुलिस भर्तियां की गईं, महिला सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया। युवाओं के लिए नई योजनाएं शुरू की गईं। मॉडर्न पुलिसिंग, सुदृढ़ साइबर और फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी विशेष कार्य किया गया। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से उत्तर प्रदेश अब फियर जोन से फेथ जोन में बदला है। सीएम ने एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष पर हमला किया। कहाकि सपा संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रही है। समाज को आपस में लड़ाने, आस्था का अपमान, गुंडागर्दी व अराजकता को बढ़ाने के साथ संवैधानिक मूल्य पर भी प्रहार करने में नहीं चूक रहे हैं। यह संवैधानिक संस्थाओं की अवहेलना, मजाक, अपमान है। एसआईआरए में 2.88 करोड़ से अधिक लोग अनुपस्थित, मृत या शिफ्टिंग हैं। सपा इन्हें जबर्दस्ती वोट बनाकर फर्जी पोलिंग करती थी।
 

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