उन्नाव में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का अजीब विवाद: 459 जोड़ों को बांटे गए TMC जैसे प्रिंट वाले गद्दे, डीएम ने बैठाई जांच
अलीगढ़ की फर्म से जुड़े इस मामले में सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।
उन्नाव
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत नवविवाहित जोड़ों को बांटे गए उपहारों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। योजना के तहत नवदंपतियों को दिए गए कुछ गद्दों पर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के झंडे और चुनाव चिह्न से मिलता-जुलता प्रिंट मिलने का मामला सामने आया है। मामला तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है।


24 जुलाई को हुआ था सामूहिक विवाह समारोह
समाज कल्याण विभाग की ओर से 24 जुलाई को डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में कुल 459 जोड़ों ने विवाह की रस्में पूरी की थीं। योजना के प्रावधानों के तहत सरकार द्वारा नवविवाहित जोड़ों को अलमारी, बेड, गद्दा, पंखा और अन्य घरेलू जरूरत का सामान उपहार स्वरूप दिया जाता है, जिसके लिए सरकार द्वारा अलग से बजट आवंटित किया जाता है।

गद्दों के प्रिंट को लेकर मचा हड़कंप
विवाद तब शुरू हुआ जब जोड़ों को वितरित किए गए कुछ गद्दों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। इन गद्दों पर हरे, सफेद और केसरिया रंग के साथ-साथ फूल का डिजाइन बना हुआ था और उस पर अंग्रेजी में 'TMC' भी लिखा हुआ दिखाई दे रहा था। तस्वीरों को देखने के बाद लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि क्या सरकारी योजना के तहत बांटे जाने वाले सामान में राजनीतिक प्रचार या इस तरह की लापरवाही बरती गई है।

DM ने बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने तुरंत संज्ञान लिया और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) कृति राज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। प्रशासन ने अलीगढ़ की संबंधित फर्म को नोटिस भेजकर जांच शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि इन गद्दों की खरीद किस सप्लायर या एजेंसी के जरिए की गई थी और इसके डिजाइन चयन में किस स्तर पर चूक हुई है।
