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Vijay Singh Gond Death: सपा विधायक व आदिवासी राजनीति के पितामह विजय सिंह गोंड का निधन, लखनऊ में ली अंतिम सांस

SGPGI में लंबे इलाज के दौरान हुआ निधन, दुद्धी से आठ बार विधायक रहे विजय सिंह गोंड के जाने से सोनभद्र में शोक की लहर

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लखनऊ/सोनभद्र |  समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और दुद्धी विधानसभा सीट से विधायक विजय सिंह गोंड का गुरुवार को लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष अवध नारायण यादव ने की है।

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बताया गया कि विजय सिंह गोंड की दोनों किडनियां खराब हो गई थीं, जिसके चलते उन्हें SGPGI में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

सोनभद्र में शोक की लहर

विजय सिंह गोंड के निधन से सोनभद्र जिले सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक, सामाजिक और विशेष रूप से आदिवासी समाज ने एक मजबूत और निर्भीक नेता को खो दिया है। समर्थक और कार्यकर्ता उनके निधन को आदिवासी राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बता रहे हैं।

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आदिवासी राजनीति के ‘पितामह’

प्रदेश की 403वीं और अंतिम विधानसभा सीट दुद्धी से जुड़े विजय सिंह गोंड को आदिवासी राजनीति का ‘पितामह’ कहा जाता था। वे आदिवासी समाज की आवाज को विधानसभा से लेकर सड़क तक बुलंद करने वाले अग्रणी नेताओं में शामिल थे। सदन में उन्होंने आदिवासी अधिकारों, वन अधिकार और सामाजिक न्याय के मुद्दों को मजबूती से उठाया।

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आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी लड़ाई

दुद्धी और ओबरा विधानसभा क्षेत्रों को अनुसूचित जनजाति (ST) सीट घोषित कराने के लिए विजय सिंह गोंड ने सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष किया। यह लड़ाई आदिवासी समाज के राजनीतिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जाती है।

कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

विजय सिंह गोंड का राजनीतिक जीवन संघर्ष और सादगी का प्रतीक रहा। वे वनवासी सेवा आश्रम में मात्र 200 रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत थे। वर्ष 1979 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में प्रवेश किया।

आठ बार बने विधायक

वर्ष 1989 में अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को पराजित कर उन्होंने आदिवासी राजनीति में नया अध्याय लिखा। अलग-अलग राजनीतिक दलों से होते हुए वे आठ बार विधानसभा के सदस्य चुने गए। उन्होंने प्रदेश की राजनीति में आदिवासी समाज को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक

विजय सिंह गोंड के निधन पर राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें संघर्षशील, ईमानदार और आदिवासी हितों के प्रति समर्पित नेता बताया।
 

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