लखनऊ में शंकराचार्य से मिले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कहा-नकली संतों का अंत होने जा रहा है
गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने और गौ हत्या पर पाबंदी के लिए ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध‘ का शंकराचार्य ने किया है आगाज
तमाम प्रतिबंधों के बावजूद शंकराचार्य कर रहे प्रवास, हो रही सभा
लखनऊ। गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने और देश में गौ हत्या पर पाबंदी के लिए ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध‘ का आगाज करनेवाले ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरूवार को लखनऊ में मुलाकात की। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात के बाद भाजपा पर हमला किया। उन्होंने कहा कि हम यहां असली संत से आशीर्वाद लेने आए थे। क्योंकि असली संतों से मिलने से नकली संतों का अंत होने जा रहा है। कहाकि जब हमारी सरकार थी तो हमने डेयरी बनवाई थी, जिससे गरीबों का लाभ हो और गायों की भी देखभाल हो लेकिन भाजपा के लोग हर अच्छी बात का विरोध करते हैं।


गौरतलब है कि शंकराचार्य ने काशी से ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध‘ का एलान किया था। उन्होंने गाय को राज्यमाता घोषित करने के लिए यूपी की योगी सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने पर शंकराचार्य विभिन्न क्षेत्रों से जनजागरण करते मंगलवार की रात लखनऊ पहुंचे थे। बुधवार को उन्होंने विद्वत सभा की। अब उनसे मिलने सपा मुखिया भी पहुंचे। अखिलेश यादव अपने आवास से दोपहर साढ़े 12 बजे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मिलने के लिए निकले और कार्यक्रम स्थल पहुंचे। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी और पूर्व सांसद अनु टंडन भी थे।


अखिलेश ने सभी संतों से हाथ जोड़कर प्रणाम किया। गौरतलब है कि माघ मेला 2026 के दौरान मौनी अमावस्या को स्नान से रोके जाने, बटुकों की चोटी पकड़कर अपमानित करने और दुर्व्यवहार से क्षुब्ध शंकराचार्य ने प्रयागराज में धरना दिया था। इसके बाद उन्होंने योगी सरकार के खिलाफ ‘जंग‘ का एलान कर दिया। इस दौरान विपक्षी दलों से कई नेताओं ने शंकराचार्य से सम्पर्क किया। हालांकि शंकराचार्य को लखनऊ में कार्यक्रम करने के लिए प्रशासन की ओर से कई प्रतिबंध लगाये गये है। ऐसे में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लखनऊ कार्यक्रम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की शर्तों को लेकर निशाना साधा था। सभा की शर्तों पर सवाल उठाए थे। अब सपा मुखिया के शंकराचार्य से मुलाकात के बाद सियासी गलियारे में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

