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Shri Krishna Janmabhoomi Shahi Idgah Dispute: सुलह वार्ता विफल, हिंदू पक्ष बोला- मस्जिद के लिए नहीं देंगे एक इंच जमीन

मुस्लिम पक्ष की गैरहाजिरी पर भड़का हिंदू पक्ष, प्रस्ताव लिया वापस

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श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद में समझौते की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मथुरा के सुलह-समझौता केंद्र में आयोजित वार्ता प्रक्रिया बेनतीजा साबित हुई है। मंगलवार को तय की गई दूसरी सुनवाई में मुस्लिम पक्ष के उपस्थित न होने के कारण कोर्ट ने कार्यवाही को स्थगित कर दिया।

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सुलह का रास्ता बंद होने के बाद अब इस पूरे मामले पर देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) में सुनवाई की जाएगी।

मुस्लिम पक्ष की गैरहाजिरी पर भड़का हिंदू पक्ष, प्रस्ताव लिया वापस

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष व अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 7 अगस्त को हुई पहली वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद मंगलवार को दूसरी बैठक तय की गई थी। लेकिन मुस्लिम पक्ष के न पहुंचने से वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।

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  • कड़ा रुख: वार्ता विफल होने के बाद हिंदू पक्ष ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि पहले मुस्लिम पक्ष को ईदगाह हटाने के बदले किसी अन्य जगह वैकल्पिक जमीन देने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन अब इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया है।

  • 'एक इंच जमीन भी नहीं देंगे': हिंदू पक्ष का दावा है कि विवादित स्थल की पूरी भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की ही है, इसलिए अब मस्जिद के लिए कोई वैकल्पिक जमीन या मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

दस्तावेज न होने का दावा: मेवात में मस्जिद बनवाने का दिया था प्रस्ताव

मामले के एक अन्य पक्षकार दिनेश फलाहरी ने मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास इस विवादित स्थल के मालिकाना हक से जुड़े कोई ठोस दस्तावेज नहीं हैं, इसी वजह से वे बार-बार समझौता वार्ता और कानूनी प्रक्रियाओं से कतरा रहे हैं।

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फलाहरी ने बताया कि उन्होंने पूर्व में मुस्लिम पक्ष को मेवात क्षेत्र में जमीन देने और नई मस्जिद के निर्माण का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

मथुरा सुलह केंद्र में वार्ता विफल होने के बाद अब दोनों पक्षों की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। शीर्ष अदालत में इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले पर विस्तृत सुनवाई होने वाली है, जिससे आगे की कानूनी दिशा तय होगी।