ओमान में अमेरिकी हमले का शिकार हुआ देवरिया का लाल: मर्चेंट शिप पर नाविक शिवानंद चौरसिया की मौत, परिवार में कोहराम
10 जून को हुआ था अमेरिकी नेवी का हमला, गरीबी से लड़कर बने थे परिवार की 'रीढ़'
देवरिया: ओमान के समंदर में हुए एक भीषण अमेरिकी हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का एक लाल शहीद हो गया है। मर्चेंट नेवी के मालवाहक जहाज पर नाविक (Sailor) के रूप में तैनात सुरौली गांव के निवासी शिवानंद चौरसिया (38 वर्ष) की इस हमले में दर्दनाक मौत हो गई। गुरुवार को जैसे ही यह दुखद खबर उनके पैतृक गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम पसर गया और परिजनों में कोहराम मच गया।


सूचना मिलते ही सुरौली थाने की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी फौरन पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और घटना का ब्योरा जुटाया।
10 जून को हुआ था अमेरिकी नेवी का हमला
दुबई में काम करने वाले शिवानंद के भाई रामप्रवेश चौरसिया ने बताया कि ओमान के मर्चेंट शिप 'एमटी सेटेबेलो' (MT Settebello) पर शिवानंद चौरसिया नाविक के पद पर कार्यरत थे। बीते 10 जून को इस जहाज पर अमेरिकी नेवी द्वारा हमला किया गया था। हमले के बाद क्रू मेंबर के 24 सदस्यों में से तीन लोग लापता हो गए थे, जिनमें शिवानंद भी शामिल थे। गुरुवार की सुबह उनका शव बरामद हुआ, जिसकी आधिकारिक जानकारी शिपिंग कंपनी ने परिजनों को दी।

गरीबी से लड़कर बने थे परिवार की 'रीढ़'
शिवानंद चौरसिया के पिता रामजी चौरसिया और माता कलावती देवी गांव में ही खेती-मजदूरी कर किसी तरह जीवन-यापन करते थे। परिवार की माली हालत बेहद खराब थी। बड़े बेटे होने के नाते शिवानंद ने बचपन से ही पिता के संघर्षों को देखा और कम उम्र में ही परिवार की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।

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पढ़ाई छोड़ शुरू की नौकरी: गरीबी के कारण उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी और पुणे समेत देश के कई शहरों में नौकरियां कीं।
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दुबई जाकर बदला परिवार का भाग्य: इसके बाद वह दुबई गए और दो साल कड़ी मेहनत कर परिवार को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला। इसी दौरान उन्होंने अपनी और अपनी बहन की शादी करवाई, गांव में पक्का मकान बनवाया और छोटे भाई रामप्रवेश को भी रोजगार के लिए अपने खर्चे पर दुबई भेजा।
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मर्चेंट नेवी का सपना: दुबई से लौटने के बाद उन्होंने लखनऊ से मर्चेंट नेवी का कोर्स किया। 27 सितंबर 2024 को वह मुंबई गए और 5 दिसंबर 2025 को सिंगापुर से मालवाहक जहाज पर अपनी पहली ड्यूटी जॉइन की थी।
9 जून को पत्नी से हुई थी आखिरी बात
शिवानंद की पत्नी सुशीला देवी ने रोते हुए बताया कि वह अपने 5 साल के बेटे राजवीर और 2 साल की बेटी वामिका को लेकर मायके (रामलक्षन के रामनगर) गई हुई थीं। 9 जून की रात को शिवानंद का फोन आया था, दोनों के बीच काफी बात हुई। इसी बीच बच्चे रोने लगे तो सुशीला ने फोन रख दिया। बच्चों को सुलाने के बाद जब सुशीला ने दोबारा फोन किया तो फोन रिसीव नहीं हुआ।
अगले दिन फोन पूरी तरह से बंद हो गया, जिसके बाद सुशीला ने दुबई में रह रहे अपने देवर रामप्रवेश को इसकी जानकारी दी। रामप्रवेश ने जब कंपनी से संपर्क साधा तो गुरुवार सुबह इस खौफनाक हादसे की सच्चाई सामने आई।
प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे गांव, सांत्वना दी
देर रात घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर प्रवीन कुमार, तहसीलदार केके मिश्रा, कानूनगो गौरव सिंह और हल्का लेखपाल पवन कुमार यादव के साथ रात आठ बजे मृतक नाविक के घर सुरौली पहुंचे। अधिकारियों ने शोक संतप्त माता-पिता और बदहवास पत्नी को ढांढस बंधाया और हर संभव सरकारी मदद का भरोसा दिया है।
