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आजम खां को रामपुर कोर्ट से बड़ी राहत, अभिलेखों में हेराफेरी मामले में जमानत मंजूर; फिर भी जेल में ही रहेंगे सपा नेता

एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने दी शत्रु संपत्ति मामले में बेल, अन्य मुकदमों और सजा के कारण अभी नहीं आ पाएंगे जेल से बाहर।

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रामपुर (भदैनी मिरर डेस्क):

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खां को सोमवार को कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी कामयाबी मिली है। रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने शत्रु संपत्ति पर कब्जे के लिए रिकॉर्ड रूम के अभिलेखों में हेराफेरी करने के मामले में आजम खां की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। हालांकि, इस राहत के बाद भी आजम खां के जेल से बाहर आने की उम्मीदें फिलहाल धूमिल हैं, क्योंकि वे अन्य मामलों में पहले से ही सजा काट रहे हैं।

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सेशन कोर्ट में हुई जोरदार बहस

आजम खां पर आरोप था कि उन्होंने शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे के लिए सरकारी रिकॉर्ड रूम के दस्तावेजों में हेराफेरी की। इस मामले में पुलिस ने जांच के दौरान धारा 467, 471 और 120बी जैसी गंभीर धाराएं बढ़ाई थीं। पूर्व में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी, जिसे आजम के अधिवक्ताओं ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी।

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आजम खां के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया है।

क्यों नहीं आ पाएंगे जेल से बाहर?

भले ही इस मामले में उन्हें बेल मिल गई हो, लेकिन आजम खां फिलहाल अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के 'दो पैनकार्ड' मामले में सात साल की सजा काट रहे हैं। इसके चलते उन्हें अभी रामपुर जिला कारागार में ही रहना होगा।

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अन्य मामलों में भी बढ़ी हलचल

सोमवार को कोर्ट में आजम खां से जुड़े कई अन्य मामलों में भी सुनवाई हुई:

  • भड़काऊ भाषण मामला: टांडा थाने में दर्ज इस मुकदमे में वीडियोग्राफर पंकज कुमार ने गवाही दी। हालांकि गवाही पूरी नहीं हो सकी और अगली सुनवाई 13 मई को होगी।

  • फांसीघर जमीन विवाद: गंज कोतवाली में दर्ज जेल की फांसीघर की जमीन कब्जाने के मामले में चार्जफ्रेम (आरोप तय) होना था, लेकिन सुनवाई टल गई। अब इस पर 27 मई को विचार होगा।

  • मारपीट का मुकदमा: आजम के करीबियों पर दर्ज पड़ोसी से मारपीट के मामले में भी गवाह सौलत अली की गवाही हुई, जो अधूरी रही। अगली तारीख 27 मई तय की गई है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा

आजम खां को मिली इस जमानत को उनके समर्थकों के लिए एक मनोवैज्ञानिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। रामपुर की राजनीति और आजम खां के मुकदमों पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।