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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बढ़ी रार: ट्रस्ट और मंदिर निर्माण समिति में बढ़ीं दूरियां

एसआईटी (SIT) जांच के बीच निर्माण समिति के अध्यक्ष ने उठाए ट्रस्ट की कार्यशैली पर सवाल; पीएमओ (PMO) को भेजी रिपोर्ट, राम जन्मभूमि परिसर में बड़े फेरबदल के संकेत

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भदैनी मिरर, अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी होने का मामला सामने आने और एसआईटी (SIT) द्वारा इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब एक नया प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। इस संवेदनशील मामले की जांच की आंच के चलते 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' और 'महानिर्माण समिति' के बीच आंतरिक दूरियां काफी बढ़ गई हैं। इस बीच, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा के सख्त तेवरों ने राम जन्मभूमि परिसर से लेकर राजनीतिक गलियारों तक खलबली मचा दी है।

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नृपेंद्र मिश्रा ने उठाए सवाल, पीएमओ को सौंपी पूरी रिपोर्ट

सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बाद से ही निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा खुद इसकी असलियत और व्यवस्थागत खामियों को परखने में जुटे थे। माना जा रहा है कि उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेज दी है। पीएमओ से हरी झंडी मिलने के बाद ही उनके कड़े रुख वाले साक्षात्कार राष्ट्रीय मीडिया चैनलों पर प्रसारित होने लगे हैं। नृपेंद्र मिश्रा ने खुलकर ट्रस्ट की वर्तमान कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थागत सुधार और कड़ी आपराधिक जांच का संकेत दिया है।

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कुशल और अनुभवी सीईओ (CEO) की नियुक्ति की मांग

नृपेंद्र मिश्रा का मानना है कि जब तक इस मामले के दोनों पहलुओं—कड़ी विधिक कार्रवाई और आंतरिक व्यवस्था में सुधार—पर समान गंभीरता से काम नहीं होगा, तब तक देश-दुनिया के श्रद्धालुओं का विश्वास पुनर्स्थापित नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राम मंदिर अब केवल एक स्थानीय धार्मिक संस्था नहीं रह गया है, बल्कि यह एक विशाल राष्ट्रीय संस्थान का रूप ले चुका है। इसलिए इसके संचालन के लिए कारपोरेट तर्ज पर एक आधुनिक प्रबंधन प्रणाली और एक अनुभवी व कुशल मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति बेहद जरूरी है।

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विश्वास पर आघात: नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, "जब कोई श्रद्धालु मंदिर में दान देता है, तो वह केवल पैसा नहीं देता बल्कि अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास सौंपता है। यदि किसी मंदिर में एक रुपये की भी हेराफेरी होती है, तो वह हजारों करोड़ के आर्थिक नुकसान से ज्यादा गंभीर है। राम मंदिर के लिए लाखों लोगों ने दशकों तक संघर्ष किया, हजारों कार्यकर्ताओं ने त्याग किया और करोड़ों ने अपनी गाढ़ी कमाई दान की। ऐसे में यहां की अनियमितता के दोषियों को न केवल कानूनी, बल्कि कड़ा नैतिक दंड भी मिलना चाहिए।"

अंदरूनी कलह: ट्रस्ट के पदाधिकारियों में नाराजगी

इधर, सूत्रों का कहना है कि निर्माण समिति के अध्यक्ष के इन तीखे तेवरों और बयानों से ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी अंदर ही अंदर बेहद खफा हैं। उनका मानना है कि संकट के इस दौर में निर्माण समिति को ट्रस्ट का साथ देना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत आरोपों की झड़ी लगा दी गई। इससे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पूरी तरह से असहज और बैकफुट पर नजर आ रहा है। चर्चा यह भी है कि कई आरोप ऐसे थे जिनका खंडन किया जा सकता था, लेकिन समय रहते पक्ष न रखने से समाज में गलत संदेश गया।

अयोध्या राम जन्मभूमि परिसर में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी

वर्तमान परिदृश्य को देखें तो निर्माण समिति के अध्यक्ष द्वारा उठाए गए कदम अब चरणबद्ध तरीके से जमीनी कार्रवाई के रूप में दिखने लगे हैं। मामले में एफआईआर दर्ज होने से लेकर गिरफ्तारियां तक हो चुकी हैं। सोशल मीडिया पर तो ट्रस्ट के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफे की अफवाहें भी तैर रही हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन विभागीय सूत्रों का दावा है कि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कुछ प्रमुख लोगों के दायित्वों को बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।