Ram Mandir : राम मंदिर चढ़ावा विवाद में टिन्नू यादव ने तोड़ी चुप्पी; वीडियो जारी कर बताया- कहां से आए करोड़ों रुपये
SIT ने शुरू कर दी है जांच, बाबरी मस्जिद के पूर्व पैरोकार इकबाल अंसारी ने भी की निष्पक्ष जांच की मांग
अयोध्या (भदैनी मिरर): श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और आभूषणों में कथित हेरफेर का मामला गरमाता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने संभाल ली है। इसी बीच, पिछले कई दिनों से विवादों के केंद्र में रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने मंगलवार को अपनी चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया पर एक ढाई मिनट का वीडियो जारी कर टिन्नू यादव ने खुद पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और झूठा करार दिया है।


वायरल वीडियो में टिन्नू यादव ने अपनी संपत्तियों, मकान और आय के स्रोतों का पूरा लेखा-जोखा जनता के सामने रखा है।
"50 करोड़ की संपत्ति का आरोप गलत, ऑटो चलाकर खरीदी थी जमीन"
वीडियो में अपनी सफाई देते हुए 51 वर्षीय टिन्नू यादव ने कहा, "मुझ पर लगाए जा रहे सारे आरोप मनगढ़ंत हैं। जिस जमीन को 50 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है, उसका बैनामा मैंने साल 2008 में ही करा लिया था। साल 2015-16 में मैंने उस पर मकान का निर्माण कार्य शुरू कराया। संगठन (RSS/VHP) का काम करने के दौरान मैं साइड में ऑटो चलाने का काम भी करता था और उसी मेहनत की कमाई से मैंने यह जमीन जोड़ी थी।"

टिन्नू ने आगे बताया कि साल 2019 में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही उनका मकान बनकर तैयार हो चुका था। साल 2020 में जब मंदिर की पाइलिंग (नींव) का काम करने वाली कंपनी अयोध्या आई, तो उन्हें रहने के लिए आठ कमरों की जरूरत थी। टिन्नू ने अपना मकान उस कंपनी को किराए पर दे दिया, जो एक साल तक वहां रही। उन्होंने दावा किया कि यही उनकी मुख्य आमदनी का जरिया है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि भगवान सब देख रहे हैं और आरोप लगाने वालों का न्याय वही करेंगे।

RSS और विहिप से पुराना नाता
अपने बैकग्राउंड का हवाला देते हुए टिन्नू यादव ने बताया कि वह लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 1988 में संघ का ओटीसी (ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैंप) किया था और 1993 से लगातार श्रीराम जन्मभूमि न्यास के लिए काम करते रहे। साल 2019 में जब मंदिर के पक्ष में फैसला आया, तब उन्हें राम मंदिर परिसर में सेवा कार्य में लगाया गया था।
SIT की ताबड़तोड़ जांच शुरू, पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग
दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) ने सोमवार दोपहर से अयोध्या में डेरा डालकर मामले की कड़ाई से जांच शुरू कर दी है। इसी मामले को लेकर कोतवाली नगर में एक प्रार्थना पत्र भी दिया गया है, जिसमें आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने, निष्पक्ष जांच करने और कथित गबन की सच्चाई सामने लाने की मांग की गई है।
सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी: इकबाल अंसारी
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर बाबरी मस्जिद के पूर्व पैरोकार इकबाल अंसारी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि रामलला के चढ़ावे की राशि में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता हुई है, तो इसकी तह तक जाना जरूरी है। धन कहां गया, किसने छिपाया और इसमें किसकी क्या भूमिका थी, यह साफ होना चाहिए। इकबाल अंसारी ने मांग की कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
