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प्रयागराज : थाने में 75 हजार घूस लेते इंस्पेक्टर गिरफ्तार, वाराणसी के सारनाथ का रहनेवाला है विनोद कुमार सोनकर

एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा तो बोला-छोड़ दो, बर्बाद हो जाऊंगा, स्टाफ का मामला है, रहम कीजिए

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vinod sonkar
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जिस मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगनेवाला था उसमें एक बार ले चुका था घूस, दूसरी बार मांग रहा था

प्रयागराज। प्रयागराज में एंटी करप्शन की टीम ने बारा थाना प्रभारी विनोद कुमार सोनकर को थाने के भीतर 75 हजार रुपये घूस लेते रंगेहाथ दबोचा। एंटी करप्शन विभाग की टीम थाना प्रभारी को थाना घूरपुर ले गई और वहीं मुकदमा दर्ज कराया। 2012 में दरोगा से प्रमोट होकर इंस्पेक्टर बना विनोद सोनकर वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र का रहनेवाला है। 

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विनोद सोनकर एक मुकदमे में पीड़ित से घूस ले रहा था, तभी दबोचा गया। उसने एक केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए आरोपी से पैसे मांगे थे। रूपये न देने पर जेल भेजने की धमकी दे रहा था। इससे तंग आकर आरोपित पक्ष ने एंटी करप्शन टीम को इसकी सूचना दी। टीम ने इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। आरोपी पक्ष ने थाने में जैसे ही इंस्पेक्टर को पैसे दिए, टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। टीम ने जैसे ही विनोद को पकड़ा वह आदतन अपने इंस्पेक्टर होने का रौब दिखाने लगा। फिर बोला कि छोड़ दो, बर्बाद हो जाऊंगा। स्टाफ का मामला है। कुछ तो रहम कीजिए। मगर टीम ने उसे नही छोड़ा। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर घूरपुर थाने ले जाया गया है। मामला मंगलवार दोपहर का बारा थाने का है। इंस्पेक्टर मूल रूप से वाराणसी के सारनाथ का रहने वाला है। 2012 में दरोगा से प्रमोट होकर इंस्पेक्टर बना था।

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जानकारी के अनुसार भदोही जिले के सुरियावां थाना के लुकमानपुर के संतोष कुमार दुबे के खिलाफ बारा थाने में मुकदमा दर्ज था। नवंबर माह में एक महिला ने शादी का झांसा देकर एक व्यक्ति पर दुष्कर्म और संतोष कुमार दुबे और 2 अन्य पर सुलह के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले ही उस युवती ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान में कह दिया था कि उसने गलतफहमी में मुकदमा लिखा दिया। ऐसे में अब वह कोई कार्रवाई नहीं चाहती। इसके बाद तय हो गया था कि मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगेगी। इसी मौके का फायदा उठाते हुए इंस्पेक्टर विनोद सोनकर ने 75 हजार रुपए घूस की मांग की थी। जबकि भुक्तभोगी संतोष का कहना है कि इंस्पेक्टर ने जबरन मुकदमे में उनका नाम शामिल कर दिया था। उस मुकदमे में वह नामजद नहीं थे, लेकिन जांच के दौरान शामिल होने का दावा कर उनका नाम मुकदमे में जोड़ दिया था। नाम हटाने के एवज में उसने एक बार रूपये ले लिये थे। अब दूसरी बार 75 हजार रुपए की मांग कर रहा था। तब जाकर उसे एंटी करप्शन विभाग से शिकायत करनी पड़ी। घूस की रकम लेने के लिए इंस्पेक्टर ने संतोष को थाने ही बुलाया था। एंटी करप्शन टीम पहले से ही तैयार थी। जैसे ही उसने घूस की रकम ली दबोच लिया गया। विनोद कुमार सोनकर इससे पहले प्रयागराज में खुल्दाबाद थाने का भी प्रभारी निरीक्षक रह चुका है। वहां से उसे शाहगंज थाना प्रभारी बनाया गया। यहां उसके खिलाफ शिकायतें मिलने पर उसे पुलिस लाइन भेज दिया गया। अब वह फिर जुगाड़ लगाकर 6 महीने से बारा थाने का प्रभारी बन गया था। 

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