प्रयागराज : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, शिष्य मुकुंदानंद और तीन अन्य के खिलाफ में मुकदमा दर्ज
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी कोर्ट ने दिया था मुकदमा दर्ज करने का आदेश
कोर्ट ने निष्पक्ष जांच, स्वतंत्र रूप से और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का पालन करते हुए तेजी से करने का दिया है निर्देश
प्रयागराज। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और तीन अन्य के खिलाफ एक किशोर और युवक के से दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। कोर्ट के आदेश पर झूंसी पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। यह मामला शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी से जुड़ा है। उन्होंने माघ मेले के दौरान यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। आपको बता दें कि प्रयागराज कोर्ट ने पिछले दिनों स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। धारा 351(3) के तहत मुकदमा शनिवार की देर रात दर्ज किया गया। इसके साथ-साथ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 51, 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत आरोप लगाए गए हैं। घटना की तिथि 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की बताई गई है।


गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्रू के खिलाफ पॉक्टो एक्ट की विशेष कोर्ट का फैसला आया था। कोर्ट ने झूंसी थाना प्रभारी को बच्चों के यौन शोषण के मामले में इनके खिलाफ कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत तहरीर, जानकारी और रिकॉर्ड में शामिल सामग्री के आधार पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने और कानून के अनुसार सख्ती से जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र रूप से और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का पालन करते हुए तेजी से करने का निर्देश दिया है। यह आदेश विशेष जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने दिया था।

कोर्ट ने आदेश में आशुतोष ब्रह्मचारी के प्रार्थना पत्र, पीड़ित ए एवं पीड़ित बी के बयान, स्वतंत्र गवाहों के बयान और प्रयागराज के एसीपी की जांच रिपोर्ट का हवाला दिया। कहा कि सभी तथ्यों को ध्यानपूर्वक और पूरी तरह से देखने पर यह पता चलता है कि आरोपितों पर पीड़ित ए एवं पीड़ित बी के साथ ही दूसरों से यौन शोषण के गंभीर आरोप हैं। कोर्ट ने कहा कि आरोप पॉक्सो एक्ट 2012 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत सजा वाले संज्ञेय अपराधों से जुड़े हैं। पता चला है कि पीड़ितों और दूसरे गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के साथ सबूत एकत्र करने और उन्हें रिकवर करने की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही, यह भी लगता है कि इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और दूसरे फॉरेंसिक सबूत एकत्र करने पड़ सकते हैं।

