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IPS अविनाश पांडेय समेत 18 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज करने की याचिका: किसान नेता दिग्विजय भाटी ने कोर्ट में लगाई गुहार

अवैध हिरासत, थर्ड डिग्री टॉर्चर और फर्जी एनकाउंटर की धमकी देने का गंभीर आरोप; CJM कोर्ट ने 29 सितंबर की तारीख की तय

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भदैनी मिरर डेस्क: भारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी ने पूर्व एसएसपी आईपीएस अविनाश पांडेय, उनके पीआरओ, तत्कालीन सिविल लाइंस इंस्पेक्टर और एसओजी टीम समेत कुल 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीजेएम (CJM) कोर्ट में मुकदमे की याचिका दाखिल की है।

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अपनी अर्जी में किसान नेता ने पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर अवैध हिरासत में रखने, लाठी-डंडों से पीटने, आंख व कान को गंभीर नुकसान पहुंचाने, अमानवीय व्यवहार करने और फर्जी एनकाउंटर की धमकी देने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

'एसएसपी दफ्तर में मारपीट और एसओजी ऑफिस में टॉर्चर'

दिग्विजय सिंह भाटी के अनुसार, 8 जुलाई को ललिता गौतम हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन हुआ था। उनका दावा है कि उस दिन वह शहर से बाहर थे, फिर भी पुलिस ने उन्हें फर्जी तरीके से नामजद कर दिया।

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इसी सिलसिले में बातचीत करने के लिए 19 अगस्त 2026 को वह बीकेयू जिलाध्यक्ष मोहित जाटव के साथ तत्कालीन एसएसपी IPS अविनाश पांडेय के दफ्तर पहुंचे थे। आरोप है कि आईपीएस अधिकारी ने दोनों को कमरे में ले जाकर गाली-गलौज की और मारपीट की। इसके बाद सिविल लाइंस पुलिस और एसओजी टीम को बुलाकर उन्हें एसओजी कार्यालय भेज दिया गया, जहां उनके साथ बर्बरता से मारपीट की गई।

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सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराने और फर्जी एक्सीडेंट दिखाने का आरोप

अर्जी में दावा किया गया है कि एसओजी कार्यालय में उन्हें जान से मारने और पैर में गोली मारकर फर्जी एनकाउंटर करने की धमकी दी गई। इसके बाद घटना को सड़क हादसा दिखाने के लिए उनसे जबरन मनगढ़ंत तहरीर लिखवाई गई, जिसमें स्कूटी से जाते समय पशु से टकराने की बात दर्ज कराई गई। इसके अलावा कई सादे कागजों और स्टाम्प पेपरों पर जबरन हस्ताक्षर कराने का भी आरोप है।

किसान नेता का यह भी गंभीर आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिसकर्मियों ने उनकी पत्नी को बंधक बनाकर डराया-धमकाया और दबाव बनाकर समझौते के फर्जी शपथ पत्र डीआईजी सहारनपुर के समक्ष जमा कराए।

CCTV फुटेज और मोबाइल लोकेशन सुरक्षित रखने की मांग

अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा बताते हुए किसान नेता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने की मांग की है। साथ ही कोर्ट से एसएसपी कार्यालय, एसओजी दफ्तर, सिविल लाइंस थाने और रास्ते में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और संबंधित पुलिस अधिकारियों की मोबाइल लोकेशन साक्ष्य के रूप में सुरक्षित करने की गुहार लगाई है।

कोर्ट ने 29 सितंबर की तारीख की तय

याचिका में आईपीएस अविनाश पांडेय, एसएसपी पीआरओ अजयदीप, निलंबित इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़, दरोगा मुलायम सिंह, सिपाहियों (श्याम बाबू, हरिओम, मुकेश, सुमित, ललित, विजय, विशाल, मनीष) समेत 6 अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है। सीजेएम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए 29 सितंबर 2026 की तारीख मुकर्रर की है।