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नोएडा मजदूर प्रदर्शन मामला: हाईकोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की NSA हिरासत की रद्द, राज्य की थ्योरी को बताया 'गढ़ी हुई कहानी'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की मंजूर; कहा- गिरफ्तारी प्रक्रिया में पाई गईं गंभीर खामियां, किसी अन्य मामले में वांछित न होने पर तत्काल रिहा करने का आदेश

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डिजिटल डेस्क, प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़े मामले में 25 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी को बड़ी कानूनी राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका / NSA) के तहत हिरासत को बुधवार को रद्द कर दिया।

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जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका को स्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की ओर से पेश की गई दलीलें और कहानी 'गढ़ी हुई' प्रतीत होती हैं। अदालत ने आदेश जारी किया कि यदि आकृति किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत जेल से रिहा किया जाए।

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गिरफ्तारी और नोटिस की प्रक्रिया में सामने आईं गंभीर खामियां

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत जारी नोटिसों और गिरफ्तारी के घटनाक्रम का गहन परीक्षण किया।

  • नोटिस से पहले गिरफ्तारी: राज्य सरकार ने दावा किया कि आकृति को 12 अप्रैल 2026 को सुबह गिरफ्तार किया गया और उससे पहले धारा 130 के तहत नोटिस दिया गया था। हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड और सामान्य डायरी (GD) की प्रविष्टियों को देखकर पाया कि पहले गिरफ्तारी की गई और बाद में कागजी नोटिस तैयार किया गया।

  • हिंसा का समय और भूमिका: राज्य के दावों पर सवाल उठाते हुए जस्टिस श्रीधरन ने टिप्पणी की कि 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी। रिकॉर्ड से स्पष्ट होता है कि जिस हिंसा की बात कही जा रही है, वह उनकी गिरफ्तारी के बाद की है।

वीडियो साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा राज्य

मंगलवार को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ऐसे वीडियो साक्ष्य और फुटेज पेश करने को कहा था, जिनमें आकृति चौधरी को भीड़ को उकसाते, पथराव करते या आगजनी के लिए भड़काते हुए देखा जा सके। राज्य सरकार द्वारा समय मांगे जाने पर अदालत ने अतिरिक्त समय देने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही लगभग पांच महीने जेल में बिता चुकी हैं।

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क्या था पूरा मामला?

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में हुए नोएडा मजदूर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। बाद में 13 मई को गौतम बुद्ध नगर पुलिस की सिफारिश पर उनके खिलाफ रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई की गई थी।

आकृति ने अपने वकील के माध्यम से इस कड़े कानून के तहत की गई हिरासत को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत के इस फैसले से अब उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।