मेरठ का चर्चित 'नीला ड्रम' हत्याकांड: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड, फैसला सुनते ही छलके आंसू
बिना चश्मदीद के फॉरेंसिक व डिजिटल साक्ष्यों से खुला राज
मेरठ (भदैनी मिरर डेस्क): उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड यानी 'नीला ड्रम केस' में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मामले के दोनों मुख्य दोषियों—मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला—को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किए गए दोनों दोषियों ने जैसे ही सजा का फैसला सुना, वे भावुक हो गए। मुस्कान ने हाथ जोड़कर अपनी मासूम बेटियों की परवरिश की गुहार लगाई, वहीं साहिल शुक्ला की आंखें भी नम हो गईं।
कोर्ट में पेशी और सजा सुनाए जाने का घटनाक्रम
सजा के निर्धारण से पहले अदालत ने दोनों आरोपियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अलग-अलग पेश कर उनका पक्ष रखने का अवसर दिया। जब कोर्ट ने पूछा कि क्या वे सजा पर कुछ कहना चाहते हैं, तो दोनों ने पहले कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
लंच के बाद दोबारा पेशी के दौरान जिला जज ने फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों पर विचार करते हुए दोनों को फांसी की सजा का फैसला सुनाया। सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, फैसले के समय मुस्कान कोर्ट के सामने हाथ जोड़कर खड़ी थी और बाद में फफक-फफक कर रोने लगी। जेल प्रशासन ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से दोनों दोषी काफी बेचैन थे और ठीक से खाना भी नहीं खा पा रहे थे।
अभियोजन और बचाव पक्ष की तीखी बहस
सुनवाई के दौरान अदालत में दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई:
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अभियोजन पक्ष की मांग: जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने अपराध की क्रूरता, योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या और शव को नीले ड्रम में सीमेंट डालकर छुपाने की कोशिश का हवाला देते हुए 'रेरेस्ट ऑफ रेयर' (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामला बताया और फांसी की सजा की मांग की।
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बचाव पक्ष की अपील: बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने मुस्कान की दो छोटी बेटियों (जिनमें से बड़ी बेटी की उम्र लगभग 7 वर्ष है) के भविष्य और परवरिश की दुहाई देते हुए अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की थी।
अदालत ने अपराध की विभीषिका को सर्वोपरि मानते हुए बचाव पक्ष की दया याचिका को खारिज कर दिया।
कैसे अंजाम दिया गया था जघन्य हत्याकांड?
पुलिस जांच और आरोप-पत्र (Chargesheet) के मुताबिक, घटना की रात सौरभ राजपूत अपनी मां के घर से कोफ्ते की सब्जी लेकर आया था। आरोप है कि मुस्कान ने उसी सब्जी में नशीली दवा मिला दी। सौरभ के बेसुध होते ही मुस्कान ने अपने साथी साहिल शुक्ला को घर बुलाया।
दोनों ने मिलकर सौरभ की हत्या कर दी और शव के टुकड़े कर दिए। साक्ष्य छुपाने के इरादे से शव के टुकड़ों को प्लास्टिक के नीले ड्रम में रखकर ऊपर से सीमेंट भर दिया गया था, ताकि दुर्गंध बाहर न आ सके।
बिना चश्मदीद के फॉरेंसिक व डिजिटल साक्ष्यों से खुला राज
मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी (Eye-witness) न होने के कारण तत्कालीन ब्रह्मपुरी थाना प्रभारी रमाकांत पचौरी की टीम ने परिस्थितिजन्य और डिजिटल साक्ष्यों का सहारा लिया:
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कैब और होटल फुटेज: वारदात के बाद दोनों आरोपियों द्वारा बुक की गई कैब के ड्राइवर के बयान और होटल के सीसीटीवी फुटेज अहम साबित हुए।
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सीडीआर व लोकेशन: दोनों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन और होटल रजिस्टर के रिकॉर्ड्स जुटाए गए।
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फॉरेंसिक रिपोर्ट: ड्रम से कटर के जरिए काटे गए शव के अवशेषों और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट ने मामले को मजबूती दी।
सौरभ राजपूत हत्याकांड: पूरी टाइमलाइन
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24 फरवरी 2025: सौरभ राजपूत लंदन में अपनी नौकरी छोड़कर मेरठ अपने घर लौटा।
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3 मार्च 2025: पुलिस जांच के अनुसार इसी दौरान सौरभ की हत्या की गई।
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4 मार्च 2025: शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट से दबाया गया।
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18 मार्च 2025: सौरभ के भाई बब्लू की शिकायत पर गुमशुदगी/हत्या की धाराओं में जांच शुरू।
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19 मार्च 2025: घर से नीला ड्रम काटकर सौरभ का शव बरामद, मुस्कान और साहिल गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए।
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12 मई 2025: पुलिस ने अदालत में चार्जशीट (आरोप-पत्र) दाखिल किया।
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30 सितंबर 2026: अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
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14 अक्टूबर 2026: जिला अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
