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पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण का चंदा मांगने पहुंच गये मेरठ, मचा हंगामा

विधायक और व्यापारियों ने सदर सराफा बाजार से 50 लोगों को पकड़कर किया गया पुलिस के हवाले

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पुलिस ने 21 लोगों का ही किया सत्यापन, बाकी बिना सत्यापन के छोड़ा, विधायक ने जताई नाराजगी

प्रधानमंत्री मोदी के मेरठ कार्यक्रम से पहले गरमाया बाबरी मस्जिद के लिए चंदा मांगने का विवाद

मेरठ। पश्चिम बंगाल में बन रही बाबरी मस्जिद के लिए चार दर्जन से अधिक लोग शुक्रवार को मेरठ पहुंच गये। इसकी जानकारी के बाद सदर सराफा बाजार में हंगामा मच गया। कैंट विधायक और व्यापारियों ने चंदा मांगने आये 50 लोगों को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने 21 लोगों का सत्यापन कर और बाकी लोगों को बिना सत्यापन के ही छोड़ दिया। मेरठ में प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से पहले हुई इस घटना पर विधायक ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और इस मामले में कार्रवाई की मांग की। बाद में पुलिस अधीक्षक नगर आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि सत्यापन कराया जाने के साथ मामले की जांच की जा रही है।

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गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद ज़िले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा हुई थी। 11 फ़रवरी को औपचारिक रूप से इस मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। मुर्शिदाबाद ज़िले में ’बाबरी मस्जिद’ के निर्माण की घोषणा के बाद राज्य समेत पूरे देश में सियासी हलचल मची हुई है। इस विवाद के केंद्र में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुमायूँ कबीर हैं। इसकी घोषणा के बाद पार्टी ने उन्हें निकाल दिया तो उन्होंने अपनी नई पार्टी बना ली है। आपको यह भी बता दें कि वर्ष 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद वहां राम मंदिर का निर्माण हुआ। अयोध्या के नज़दीक ही नई मस्जिद के लिए ज़मीन आबंटित की गई थी, लेकिन वहां अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। अब पश्चिम बंगाल के एक मुस्लिम बहुल ज़िले में बन रही बाबरी मस्जिद बहस के केंद्र में है। 11 फ़रवरी को जब मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो विशेष समुदाया के क़रीब एक लाख लोग बेलडांगा पहुंचे थे। अब इस मस्जिद के निर्माण के लिए देश के विभिन्न राज्यों में घूमकर चंदा वसूला जा रहा है।

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इसी कड़ी में चंदा मांगने करीब 50 लोग शुक्रवार को सदर सराफा बाजार पहुंचे। दूसरे समुदाय के इन लोगों को व्यापारियों ने पकड़ लिया। इसी दौरान पीएम के मेरठ कार्यक्रम के सिलसिले में कैंट विधायक अमित अग्रवाल जनसंपर्क कर रहे थे। विधायक को व्यापारियों ने सूचना देकर बुलाया और इसके बाद 50 लोगों को सदर बाजार पुलिस के हवाले कर दिया गया। बताते हैं कि पुलिस ने इन 50 लोगों में से 21 की सूची सत्यापन के लिए बनाई। बाकी लोगों को बिना सत्यापन के ही छोड़ दिया गया। इससे नाराज कैंट विधायक अमित अग्रवाल और व्यापारी सदर बाजार थाने पहुंचे। उन्होंने जमकर हंगामा किया। विधायक अग्रवाल ने पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय को फोन पर मामले की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर दो टीमें गठित की गईं और टीमों को छोड़े गये लोगों को पकड़ने के लिए रोडवेज बस अड्डे और रेलवे स्टेशन भेजा गया।

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कैंट विधायक ने बताया कि उन्हें व्यापारियों ने बताया कि कुछ लोग बंगाल में बन रही बाबरी मस्जिद के लिए चंदा मांग रहे हैं। विशेष समुदाय के लोगों के घरों और दुकानों में घुसकर चंदा मांगा जा रहा है। इसके बाद वह पहुंचे थे। उनका कहना था कि एक व्यक्ति का आधार कार्ड पश्चिम बंगाल का था। विधायक ने पुलिस को 50 लोगों को सौंपने के बाद सवाल उठाया कि केवल 21 लोगों का ही सत्यापन क्यों किया गया। पुलिस ने पश्चिम बंगाल, असम और बिहार समेत कई राज्यों के लोगों को बिना सत्यापन के क्यों छोड़ दिया। पुलिस की यह गंभीर लापरवाही है। उधर, अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने कहा कि बंगाल में बनाई जा रही बाबरी मस्जिद पूरे देश में सांप्रदायिक माहौल खराब करने की साजिश है। इसके लिए पूरे देशभर से चंदा एकत्र किया जा रहा है। उन्होंने पकड़े गए लोगों का सत्यापन कराकर सख्त कार्रवाई की मांग की।