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आईएएस रिंकू सिंह राही पर शासन का शिकंजा: नोटिस जारी कर मांगा जवाब, लेटरबाजी और हंगामे पर घिरे अफसर

जालौन में धरना-प्रदर्शन, बिना अनुमति जांच और जनभावनाएं भड़काने का आरोप, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण

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Rinku Singh Rahi
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लखनऊ (भदैनी मिरर न्यूज़): लगातार 'लेटर बम' फोड़कर और आंदोलनात्मक रुख अपनाकर उत्तर प्रदेश सरकार व प्रशासन को असहज करने वाले आईएएस (IAS) अधिकारी रिंकू सिंह राही पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के विशेष सचिव विजय कुमार की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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आईएएस अधिकारी पर अपनी मनचाही तैनाती के लिए दबाव बनाने, सरकारी कामकाज में बाधा डालने, मीडिया के सामने हंगामा करने और सोशल मीडिया के जरिए जनभावनाएं भड़काने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

जालौन कलक्ट्रेट में हंगामे और धरना-प्रदर्शन का मामला

जारी नोटिस के मुताबिक, जालौन में संयुक्त मजिस्ट्रेट (न्यायिक) के पद पर तैनाती के दौरान 27 जून को रिंकू सिंह ने बिना अनुमति के कलेक्ट्रेट भवन से फर्नीचर उठाकर नव-निर्मित तहसील सदर (उरई) ले जाकर हंगामा व प्रदर्शन किया था।

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अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा स्पष्ट किया गया था कि उनका न्यायालय कक्ष कलेक्ट्रेट में ही रहेगा, इसके बावजूद उन्होंने मीडिया को बुलाकर माहौल खराब किया और बाद में रात 9 बजे वापस कलेक्ट्रेट पहुंचे।

बिना जांच समिति के छापेमारी और लाइव स्ट्रीमिंग

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नोटिस में आईएएस अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए एक अन्य घटना का जिक्र किया गया है। सभासदों की शिकायत पर गठित जांच समिति से हटाए जाने के बाद भी रिंकू सिंह 60-70 लोगों की भीड़ लेकर खुद ही जांच करने पहुंच गए।

अधिकारियों के अनुसार, जब उन्हें लिखित रूप से बता दिया गया था कि उनकी जगह राकेश कुमार सोनी (उप जिलाधिकारी, जालौन) को कमेटी में शामिल किया गया है, तब भी उन्होंने न केवल मनमाने ढंग से जांच की बल्कि उसका सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण भी शुरू कर दिया।

जनभावनाएं भड़काने और नरेटिव तैयार करने का आरोप

शासन की नोटिस में साफ कहा गया है कि आईएएस रिंकू सिंह द्वारा शासकीय कार्यों और जनशिकायतों के निस्तारण पर ध्यान देने के बजाय शासन-प्रशासन के खिलाफ नरेटिव तैयार किया जा रहा है।

नोटिस के मुख्य बिंदु:

  • व्हाट्सएप चैट में बार-बार गलतियां स्वीकार करने के बावजूद उनकी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया।

  • अपनी मनपसंद तैनाती के लिए शासन के खिलाफ जनभावनाएं भड़काकर आंदोलन का माहौल बनाया जा रहा है।

  • हाल ही में उन्होंने जेम (GeM) पोर्टल और आउटसोर्सिंग टेंडरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए परिवहन व श्रम विभाग के प्रमुख सचिवों को पत्र लिखा था।

फिलहाल, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने आईएएस अधिकारी से पूरे मामले पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है, जिसके बाद आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।