"यूपी की नौकरशाही के लायक नहीं हूं", 7 गोलियां खाने वाले चर्चित आईएएस रिंकू सिंह राही ने मांगा कैडर ट्रांसफर, व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
"माफिया से बड़ा खतरा उन्हें ऊपर से मिलने वाला संरक्षण", 2009 में छात्रवृत्ति घोटाला उजागर करने पर मारी गई थीं 7 गोलियां
भदैनी मिरर (Bhadaini Mirror) डेस्क: उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित और ईमानदार आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर प्रशासनिक गलियारों में सुर्खियों में हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार मोर्चा खोलने वाले आईएएस रिंकू सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक लंबा और बेबाक पोस्ट शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश से किसी अन्य राज्य या कैडर में अपना तबादला (Cadre Transfer) करने की इच्छा जताई है।


उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में स्वीकार किया कि वह यूपी की मौजूदा प्रशासनिक व नौकरशाही संस्कृति (Bureaucracy Culture) के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं हैं।
"माफिया से बड़ा खतरा उन्हें ऊपर से मिलने वाला संरक्षण": एक्स पर लिखा भावुक पोस्ट
आईएएस रिंकू सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि राज्य में सबसे बड़ी चुनौती कोई माफिया या भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि उन्हें शीर्ष स्तर से खुलेआम मिलने वाला राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण है। इसके चलते किसी भी सुधार का संघर्ष पूरी तरह निरर्थक साबित हो जाता है। अधिकारी की पूरी ऊर्जा व्यवस्था को सुधारने के बजाय उसे और अधिक बिगड़ने से रोकने में ही खर्च हो जाती है।

उन्होंने लिखा कि भ्रष्ट नौकरशाही कभी नहीं चाहेगी कि उनके जैसे दृढ़ इच्छाशक्ति वाले लोग स्वतंत्र रूप से संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप काम करें।
"खुद जीओ और लाभ पहुंचाने वालों को जीने दो": यूपी की प्रशासनिक कार्यशैली पर कड़ा प्रहार
यूपी की वर्तमान कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए रिंकू सिंह राही ने लिखा, "कुछ नौकरशाहों ने अपना एक सुविधाजनक और सरल मध्यम मार्ग चुन लिया है—'खुद जियो और खुद को लाभ पहुंचाने वालों को जीने दो। जनता जाती रहे भाड़ में, बस बीच-बीच में भीख के तौर पर उनके लिए कुछ कल्याणकारी योजनाएं लाते रहो'। लेकिन मेरा मानना है कि हार के डर से प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए।"


उन्होंने कहा कि जब सूचना और एआई (AI) के इस दौर में भी पूरे प्रदेश में एक भी ऐसी तहसील नहीं मिल पा रही है जहां बिना संरक्षण के काम हो सके, तो वहां बड़े स्तर पर सुशासन की उम्मीद रखना बेमानी है। ऐसे में अपने आत्मपरीक्षण और योग्यता के सार्थक उपयोग के लिए उनके लिए किसी दूसरे राज्य के अनुकूल माहौल में काम करना बेहतर होगा।
2009 में छात्रवृत्ति घोटाला उजागर करने पर मारी गई थीं 7 गोलियां
आईएएस रिंकू सिंह राही की पहचान एक बेहद कड़क और ईमानदार अफसर की रही है। वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले (Scholarship Scam) का पर्दाफाश किया था। इसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था और दबंगों ने उन्हें 7 गोलियां मारी थीं, जिसमें उनकी एक आंख की रोशनी चली गई थी और उनका चेहरा भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बाद में यूपीएससी (UPSC) क्रैक कर आईएएस बने। हाल ही में एक ब्लॉक प्रमुख के साथ हुए विवाद के बाद उनका तबादला कर दिया गया था, जिसके बाद से ही उनके और शासन के बीच तनातनी की खबरें आ रही थीं।
