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महाराजगंज में खौंफनाक वारदात : पत्नी ने बुजुर्ग पति पर डीजल डालकर जिंदा जलाकर मार डाला, बाहर से कमरा बंद कर भागी

भीख मांगकर जीवन यापन करते थे दम्पती, मिला था सरकारी आवास

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भीख मांगने मुम्बई गई थी सुमित्रा वहीं रामपत से कर ली थी शादी, पुलिस ने पत्नी को किया गिरफ्तार

महराजगंज। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के श्यामदेउरवा में 65 वर्षीया बुजुर्ग पत्नी ने अपने 70 वर्षीय पति रामपत को डीजल डालकर जिंदा जलाकर मार डाला। कुछ रिपोर्टों में पेट्रोल से जलाने की बात कही जा रही है। इस घटना की खबर मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। लोग बुजुर्ग महिला सुमित्रा की खौंफनाक करतूत सुनकर दहल गये। घटना के बाद पत्नी भाग गई थी। बाद में पुलिस ने सुमित्रा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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रोंगटे खड़े कर देनेवाली यह घटना श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र के बासपार कोठी टोला पिपरा में हुई। महिला ने आपसी विवाद के बाद खौंफनाक वारदात को अंजाम दिया। फिर बाहर से दरवाजा बंद कर फरार हो गई। रामपत पत्नी के साथ गांव में ही रहकर भीख मांगकर जीवन यापन करते थे। सुमित्रा ने सोमवार 2 मार्च 2026) की शाम को इस वारदात को अंजाम दिया। ग्रामीणों के अनुसार, पति-पत्नी दोनों शराब के आदी थे। सोमवार की शाम दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक हुई थी। जब रामपत कमरे में खाट पर सो गया, तब सुमित्रा ने उस पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आग लगा दी और कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। रामपत कमरे में चीखता-चिल्लाता रह गया और उसकी आवाज कोई सुन नही सका। जब बचने की उम्मीद टूट गई तो वह कमरे के कोने में जाकर बैठ गया। बैठे-बैठे उसकी मौत हो गई। सुबह ग्रामीणों ने घर से धुआं निकलता देख पुलिस को सूचना दी। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाये। कमरे से एक माचिस और बाल्टी बरामद हुई है जिसमें से पेट्रोल या डीजल की गंध आ रही थी। पत्नी सुमित्रा गांव से भागने की कोशिश कर रही थी, तभी पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सुमित्रा क्रूर है और दो साल पहले भी अपने पति पर चाकू से हमला किया था।

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पुलिस ने गांव के चौकीदार हबीब की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर ली है। तहरीर के अनुसार सुमित्रा परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए 40 वर्ष पहले मुंबई चली गई थी। वहां उसकी मुलाकात रामपत से हुई और वहीं दोनों ने शादी कर ली। करीब 10 वर्ष मुंबई में रहने के बाद सुमित्रा अपने पति रामपत और एक बेटी के साथ घर आ गई। यहां ग्राम सभा की आबादी की जमीन पर ग्राम प्रधान ने उसका सरकारी आवास बनवा दिया। इसी में पति-पत्नी साथ साथ रहने लगे। कुछ दिन बाद पुनः पूरे परिवार के साथ मुंबई चली गई। सात साल पहले वापस आई तो बेटी साथ में नहीं थी। यहां दोनों बासपार कोठी टोला पिपरा और अगल-बगल के गांवों में भीख मांगकर जीवन यापन करने लगे। 

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