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आदेश के बावजूद रिपोर्ट न देनेवाले जिला जजों से हाईकोर्ट नाराज

आपराधिक मामलों में वर्षों से लंबित चार्जशीटों पर रिपोर्ट दाखिल करने में लापरवाही का मामला 

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वर्ष 2004 से 2024 तक दाखिल ऐसे पुलिस चार्जशीट का वर्षवार विवरण मांगा था जिनमें अदालत ने चार्ज फ्रेम नहीं किया है

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में वर्षों से लंबित चार्जशीटों पर रिपोर्ट दाखिल करने में लापरवाही बरतने पर प्रदेश के अधिकांश जिला न्यायाधीशों पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेशों की अनदेखी न्यायिक अनुशासन और न्याय व्यवस्था की बुनियाद को प्रभावित करती है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के चार जिला जजों, आगरा, अयोध्या, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद को छोड़कर अन्य जिला जजों द्वारा मांगी गई रिपोर्ट पेश न कर पाने पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने इसे घोर लापरवाही और अवमानना माना है। आगरा, अयोध्या, बुलंदशहर और फर्रुखाबाद के जिला जजों की रिपोर्ट से कोर्ट संतुष्ट है। बाकी जिला जजों को 16 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी।

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हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि वर्ष 2004 से 2024 तक दाखिल ऐसी पुलिस चार्जशीट का वर्षवार विवरण दिया जाय जिनमें अभी तक अदालत ने चार्ज फ्रेम नहीं किया है। इस पर कई जिला जजों ने अधूरी रिपोर्ट दी तो कुछ ने रिपोर्ट ही नहीं दी और कुछ ने स्वयं रिपोर्ट न देकर इंचार्ज से रिपोर्ट भेजवा दी। कोर्ट ने इसे घोर लापरवाही कहा। कहा कि समय आने पर इस पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने चार जिला जजों व अमेठी के अलावा सभी जिला जजों को आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने उर्मिला मिश्रा व अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। 

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हाई कोर्ट ने कहाकि प्रदेश के 75 जिलों में से 49 जिला जजों ने मांगी गई रिपोर्ट भेजी है। अदालत ने आगरा जिला जज की रिपोर्ट की सराहना की। अन्य तीन जिला जजों की रिपोर्ट भी सही पाया और जिला जजों को आगरा जिला जज से सीखने की नसीहत दी। साथ ही यह भी कहा कि कुछ मामलों में दशकों बीत जाने के बाद भी जानबूझकर चार्ज फ्रेम नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहाकि प्रथम दृष्टया रिपोर्ट देखने से लगता है जिला जजों को आदेश समझ में नहीं आया या वह मांगी गई जानकारी देने में विफल रहे। जिला जजों का यह आचरण संस्था पर गंभीर प्रभाव डालने वाले हैं। जिला जजों के कार्य न्यायिक अनुशासन, अदालत की प्रभुता व न्याय प्रशासन के मूल नियम को प्रभावित करेंगे। जिला जज गोपनीय रिपोर्ट तैयार करने और विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही की संस्तुति करते हैं। कुल 26 जिला जजों ने रिपोर्ट ही नहीं दी। बरेली व गोंडा के अलावा किसी ने समय नहीं मांगा। जिला जजों का व्यवहार संस्था के हित में उचित कार्यवाही को आमंत्रित करता है।

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कोर्ट ने आगरा, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या को छोड़कर अन्य सभी जिला जजों को 27 फरवरी 2026 तक निर्देशानुसार रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। अमेठी जिला न्यायालय के संबंध में फिलहाल रिपोर्ट से छूट दी गई है, क्योंकि वह 2011 से अपने भवन में संचालित नहीं हो रहा और नए भवन की आधारशिला 17 जनवरी 2026 को रखी गई है। अदालत ने मामले में सहायता के लिए अधिवक्ता प्रतिमा विश्वकर्मा और जुबेरीया काज़मी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति प्रदेश के सभी जिला जजों को तत्काल भेजने का निर्देश दिया है।