सम्भल के ‘सिंघम‘ अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR के आदेश
आदेश के बाद कानून से उपर माननेवाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों में मचा हड़कम्प
सम्भल हिंसा के दौरान लगी थी टोस्ट बेचने निकले 24 वर्षीय युवक आलम को लगी थी गोली, पिता ने कोर्ट से न्याय की लगाई थी गुहार
तत्कालीन CO संभल अनुज चौधरी, संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित कई पुलिसकर्मियों को बनाया प्रतिवादी
संभल। पुलिस फायरिंग में युवक को गोली लगने के आरोप पर सीजेएम कोर्ट ने सिंघम बननेवाले एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 15 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत के इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। अदालत ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। आरोप है कि हिंसा के दौरान एक युवक को पुलिस की गोली लगी थी। जिसके बाद पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई थी। संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर अब पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर की अदालत ने इस मामले में तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
मामला नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन निवासी यामीन से जुड़ा है। यामीन ने 6 फरवरी 2024 को अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान वह शाही जामा मस्जिद इलाके में पहुंचा। जहां हिंसा के हालात बने हुए थे। यामीन का आरोप है कि पुलिस फायरिंग में आलम को गोली लगी।



मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संभल हिंसा से जुड़े एक मामले में एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 15 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किये हैं। यह मामला संभल हिंसा के दौरान पुलिस की गोली से एक किशोर के घायल होने का है. मामला थाना नखासा क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय निवासी यामीन से जुड़ा है। यामीन ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को पापे बेचने के लिए घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचते ही कथित तौर पर पुलिस ने उस पर गोली चला दी। आरोप है कि घायल होने के बाद बेटे ने पुलिस के डर से छुपकर इलाज कराया। इस सनसनीखेज आरोप के बाद यामीन ने न्यायालय की शरण ली और तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी, संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित कई पुलिसकर्मियों को प्रतिवादी बनाया। यह मुकदमा 6 फरवरी 2025 को कोर्ट में दायर हुआ था। करीब 11 महीने के बाद 9 जनवरी को मामले की सुनवाई हुई और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी नामजद और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पारित किया।

मंगलवार देर शाम इस आदेश की जानकारी सामने आई। मामले में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि संभल हिंसा की पहले ही मजिस्ट्रियल जांच हो चुकी है, उसमें पुलिस कार्रवाई सही पाई गई थी। इसलिए मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की जाएगी। सिंघम की छवि बनाने की कोशिश में लगे अनुज चौधरी वर्तमान में फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण हैं। जबकि अनुज तोमर संभल जनपद की कोतवाली चंदौसी के थाना प्रभारी हैं। संभल हिंसा के दौरान अनुज चौधरी सीओ संभल थे और बाद में प्रमोशन पाकर एएसपी बने। वे अपने 52 जुम्मे होली एक वाले बयान को लेकर भी पहले ही सुर्खियों में रह चुके हैं। आपको बता दे कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान संभल में भीषण हिंसा भड़क उठी थी। पुलिस पर पथराव और फायरिंग हुई, जिसमें चार लोगों की मौत और 29 पुलिसकर्मियों के घायल होने की पुष्टि हुई थी। इस हिंसा के बाद 12 एफआईआर दर्ज हुईं और 2200 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया। अब उसी हिंसा से जुड़े घटनाक्रम में पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर हुई है.

