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कफ सिरप तस्करी कांड में एसटीएफ के हत्थे चढ़े बर्खास्त सिपाही आलोक ने उगले राज

धनबाद और बनारस में अमित टाटा और आलोक के नाम से खोला गया था फर्म

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alok singh
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मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और उसके गुर्गे ही देखते थे सारा काम

वाराणसी, भदैनी मिरर। फेन्सेडिल कफ सिरप व कोडीन युक्त कफ सिरप व अन्य दवाओं की तस्करी के मामले में गिरफ्तार बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह ने एसटीएफ के सामने कबूल कर लिया कि वह भी इस कारोबार में शामिल था। उसके नाम से फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया गया था, जिसका काम तस्करी के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और उसके गुर्गे करते थे। गौरतलब है कि एसटीएफ ने मंगलवार को ही लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र के प्लासियो माल के पास से गिरफ्तार किया था। मूलरूप से चंदौली जिले के बलुआ थाना क्षेत्र के कैथी गांव का आलोक सिंह का लखनऊ में आलीशान मकान है। इसके अलावा उसकी कई और सम्पत्तियों की जानकारी मिली है। 

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alok singh and Tata

एसटीएफ अब तक कफ सिरप तस्करी गिरोह से जुड़े सहारनपुर के गजराज सिंंह के बेटे विभोर राणा, विशाल सिंह के अलावा अमित कुमार सिंह टाटा और मास्टराइंड और फारार चल रहे शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल को गिरफ्तार कर चुकी है। अब बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह एसटीएफ के हाथ लगा है। एसटीएफ की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार फेन्सेडिल कफ सिरप व कोडीन युक्त अन्य दवाओं को नशे के रूप में प्रयोग और अवैध भंडारण किया जा रहा था। कफ सिरप उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश भेजे जाने की सूचना प्राप्त हो रही थी। मामले में शासन के निर्देश पर स्पेशल टास्क फोर्स, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग की संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया था। जांच के दौरान भारी मात्रा में अवैध फेन्सेडिल कफ सिरप को बरामद कर लखनऊ के थाना सुशान्त गोल्फ सिटी में धारा 420, 467, 468, 471, 34, 120बी, 201 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

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ahubhM Jaiswal

इसी क्रम  में निरीक्षक अंजनी कुमार पाण्डेय, हेड कांस्टेबल गौरव सिंह, प्रशान्त सिंह, शेर बहादुर की टीम ने बर्खास्त सिपाही को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पूछताछ में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह ने एसटीएफ को बताया कि ग्राम नरवे आजमगढ़ के रहने वाले विकास सिंह के माध्यम से मेरा परिचय वाराणसी के कायस्थ टोला (प्रहलाद घाट) निवासी शुभम जायसवाल से हुआ था। आलोक सिंह ने बताया था कि शुभम जायसवाल का एबॉट कंपनी की फेन्सेडिल कफ सिरप का शैली ट्रेडर्स के नाम से बड़ा कारोबार रांची, झारखंड में है। कोडीन युक्त फेन्सेडिल कफ सिरप नशे के रूप में प्रयोग होता है, जिसकी काफी डिमांड पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में है। इसकी तस्करी में बहुत फायदा है। अगर उसके धंधे में कुछ पैसे लगाओगे तो काफी आमदनी होगी। उसने बताया कि वह इस पर लालच में आकर तैयार हो गया और साथी अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को भी बताया तो वह भी तैयार हो गया।

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बता दें कि अमित टाटा को एसटीएफ को गिरफ्तार कर चुकी है। आलोक ने बताया कि हम दोनों ने विकास सिंह के माध्यम से शुभम जायसवाल व उसके पार्टनर वरुण सिंह, गौरव जायसवाल व विशाल मेहरोत्रा के साथ बातचीत की। उन लोगों ने धनबाद में मेरा श्रेयसी मेडिकल एजेंसी के नाम से जनवरी 2024 में फर्म बनवा दिया। फर्म का सारा लेन-देन शुभम जायसवाल व उसके पार्टनर और उसका सी०ए० तुषार देखता था। धनबाद के बिजनेस में मैंने और अमित टाटा ने 5-5 लाख रूपये लगाये। मुझको और अमित टाटा को इन लोगों ने लगभग 20-22 लाख रुपए दिए। हम लोग धनबाद 2-3 बार गये थे। धनबाद व रांची का काम वरुण सिंह देखता था। इसके बाद इन लोगों के कहने पर हम दोनों के नाम से बनारस में भी ड्रग लाइसेंस लेकर फर्म खुलवाई गई। मेरे नाम मां शारदा मेडिकल के नाम से फर्म खुली। इसका भी सारा लेन-देन शुभम जायसवाल व उसके साथी देखते थे। बनारस के फर्म में दो-तीन महीने ही फेन्सेडिल का व्यापार हुआ। उसके बाद एबॉट कंपनी ने फेन्सेडिल कफ सिरप बनाना बंद कर दिया। बनारस की फर्म में भी लगभग 8 लाख रुपए का लाभ अलग-अलग समय पर शुभम के पार्टनर विकास सिंह व विशाल मल्होत्रा ने दिया था।

Bhola

रांची, गाजियाबाद में पुलिस और एसटीएफ टीम द्वारा गैंग के सौरभ त्यागी, विभोर राणा आदि को गिरफ्तार कर लेने के कारण शुभम जायसवाल अपने परिवार एवं पार्टनर वरुण सिंह, गौरव जायसवाल के साथ दुबई भाग गया है। शुभम जायसवाल व उसके पार्टनर द्वारा हम लोगों के अलावा अन्य काफी लोगों के नाम से भी इसी प्रकार फर्जी फर्म बनवाये गये हैं। इनके जरिए फेन्सेडिल कफ सीरप के कूटरचित बिल और ई-वे बिल तैयार कर फर्जी खरीद बिक्री दिखाकर उसको तस्करों के हाथ बेचकर भारी मुनाफा कमाते हैं। ड्रग लाइसेंस दिया गया। अनुभव प्रमाण पत्र और शपथ पत्र आदि फर्जी है। हम लोगों ने कभी भी किसी भी दुकान पर काम नहीं किया है। अमित टाटा के पकडे जाने के बाद मैंने कोर्ट में अपना सरेंडर प्रार्थना पत्र डाला था। इससे पहले पकड़ लिया गया। 

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