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आजमगढ़ अपर आयुक्त के नाम से जारी आदेश के फर्जीवाड़े का मामला, तीन के खिलाफ रपट दर्ज

मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना निवासी नेता ने पांच हजार रूपये लेकर कराया था दस्तखत

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एसडीएम के सामने आया प्रार्थना पत्र पर हुआ संदेह, जांच जारी 

आजमगढ़। आयुक्त कार्यालय, आजमगढ़ मण्डल में अपर आयुक्त (प्रशासन) के नाम से जारी एक आदेश को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। उप जिलाधिकारी, सदर, आजमगढ़ द्वारा प्रस्तुत एक प्रार्थनापत्र पर दिनांक 24 दिसम्बर 2025 को अंकित आदेश को अपर आयुक्त (प्रशासन) ने पूरी तरह फर्जी बताया है। जांच में पाया गया कि उक्त आदेश पर न तो अपर आयुक्त (प्रशासन), न अपर आयुक्त (न्यायिक) और न ही आयुक्त के हस्ताक्षर हैं। साथ ही, आदेश पर लगी मुहर और हस्तलिपि भी कमिश्नरी के किसी अधिकारी की नहीं पाई गई। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि जिस प्रार्थनापत्र पर फर्जी आदेश अंकित किया गया है, वह न तो आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज है और न ही आयुक्त कार्यालय के शिकायती रजिस्टर में।

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इस मामले में सूरज कुमार पुत्र बुधिराम निवासी जफरपुर अदाई, थाना जहानागंज, जनपद आजमगढ़ द्वारा दिनांक 01 जनवरी 2026 को प्रस्तुत नोटरी शपथपत्र में आरोप लगाया गया है कि नेता मनोज कुमार श्रीवास्तव निवासी सुरहुरपुर, थाना मुहम्मदाबाद, जनपद मऊ ने 5000 रुपये लेकर यह फर्जी आदेश उपलब्ध कराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आजमगढ़। अपर आयुक्त (प्रशासन), आजमगढ़ मण्डल द्वारा तत्काल संबंधित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। इस क्रम में चन्द्रमा प्रकाश, आशुलिपिक, आयुक्त कार्यालय आजमगढ़ द्वारा मूल प्रार्थनापत्र एवं शपथपत्र संलग्न कर थाना सिधारी में तहरीर दी गई। थाना सिधारी में सूरज कुमार, बुधीराम, नेता मनोज कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है।

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मामला यह है कि सदर तहसील के जहानागंज क्षेत्र के जफरपुर अदाई निवासी बुद्धिराम काफी समय से भूमि विवाद से परेशान था। उसने यह बात अपने मित्र और स्कूल संचालक फखरे आलम को बताई। इसके बाद 24 दिसंबर को फखरे आलम अपने साथ बुद्धिराम और उनके पुत्र सूरज को लेकर मुहम्मदाबाद गोहना निवासी मनोज कुमार श्रीवास्तव के पास गए। वहां मनोज श्रीवास्तव ने उनसे कहा कि पांच हजार रुपये दो। मैं मंडलायुक्त से आदेश करा दूंगा। उन्होंने मनोज का पांच हजार रूपये दिये और इसके बाद मनोज कुमार श्रीवास्तव ने अपर आयुक्त का फर्जी हस्ताक्षर किया हुआ आदेश पत्र दे दिया। अब गुरूवार को पिता-पुत्र ने एसडीएम सदर नरेंद्र गंगवार को प्रार्थना पत्र दिया। प्रार्थना पत्र देखते ही एसडीएम को संदेह हो गया। जांच हुई तो पता चला कि वह हस्ताक्षर अपर आयुक्त का नही है। इसके बाद सिधारी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। 
 

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